भारत टैक्सी की एंट्री से बदलेगा राइड सेक्टर, ड्राइवरों को मिलेगा पूरा अधिकार

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सहकारिता मंत्रालय की पहल पर शुरू की गई ‘भारत टैक्सी’ देश के मोबिलिटी सेक्टर में एक नई सोच के साथ सामने आई है। इस प्लेटफॉर्म की परिकल्पना पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल के विकल्प के रूप में की गई है, जिसमें ड्राइवरों को केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि स्वामित्व, संचालन और मूल्य सृजन की प्रक्रिया के केंद्र में रखा गया है। यहां ड्राइवरों को ‘सारथी’ कहा जाता है और पूरी व्यवस्था उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त और सम्मानजनक अवसर देने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

भारत टैक्सी देश का पहला सहकारी नेतृत्व वाला राइड हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जो ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बहु-राज्य सहकारी सोसाइटी अधिनियम 2002 के तहत पंजीकृत इस संस्था की स्थापना 6 जून 2025 को सहकारी क्षेत्र से जुड़े 8 राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों ने मिलकर की थी। यह प्लेटफॉर्म शून्य कमीशन मॉडल पर काम करता है, यानी ड्राइवरों से किसी प्रकार का कमीशन नहीं लिया जाता और मुनाफा सीधे उन्हें वितरित किया जाता है। इस तरह यह निवेश-आधारित एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म के मुकाबले एक स्वदेशी और सहकार आधारित विकल्प प्रस्तुत करता है।

फिलहाल भारत टैक्सी की सेवाएं दिल्ली एनसीआर के दिल्ली, गुरुग्राम और नोएडा के साथ-साथ गुजरात के अहमदाबाद, राजकोट, सोमनाथ और द्वारका में उपलब्ध हैं। प्लेटफॉर्म पर अब तक 9 लाख 90 हजार से अधिक ग्राहक पंजीकृत हो चुके हैं और 3 लाख से ज्यादा ड्राइवर इससे जुड़े हैं। अब तक 2 लाख 91 हजार से अधिक राइड पूरी की जा चुकी हैं। आने वाले वर्षों में 2029 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में इसकी उपस्थिति दर्ज कराने की योजना है।

वर्तमान में ऐप के जरिए सुविधा शुल्क, प्लेटफॉर्म शुल्क या कमीशन के नाम पर कोई राशि नहीं ली जा रही है। हालांकि, जिन हवाई अड्डों पर भारत टैक्सी के प्रीपेड बूथ संचालित हो रहे हैं, वहां संचालन खर्चों को ध्यान में रखते हुए किराए पर 7 प्रतिशत सेवा शुल्क लिया जाता है।

यह प्लेटफॉर्म केवल राइड सेवा तक सीमित नहीं है बल्कि सारथियों के सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देता है। स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और सेवानिवृत्ति बचत जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही एक समर्पित ड्राइवर सहायता प्रणाली भी विकसित की गई है। दिल्ली में सात प्रमुख स्थानों पर सहायता केंद्र संचालित किए जा रहे हैं जहां आपात स्थिति में त्वरित मदद और सत्यापित सवारी डेटा उपलब्ध कराया जाता है। ड्राइवरों को अन्य प्लेटफॉर्म पर काम करने की स्वतंत्रता भी दी गई है, यानी किसी तरह की विशिष्टता की बाध्यता नहीं है।

महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए ‘बाइक दीदी’ जैसी पहल भी शुरू की गई है, जिसके तहत 150 से अधिक महिला चालक पहले ही इस मंच से जुड़ चुकी हैं। इससे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और सुरक्षित परिवहन विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

आगे की रणनीति के तहत भारत टैक्सी सभी राज्यों और प्रमुख शहरों में विस्तार की तैयारी कर रही है। हर राज्य में समर्पित सहायता केंद्र स्थापित करने, चालक सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने और राष्ट्रीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के साथ गहन एकीकरण की योजना पर काम चल रहा है। स्पष्ट है कि भारत टैक्सी केवल एक ऐप नहीं बल्कि सहकार आधारित, समावेशी और टिकाऊ मोबिलिटी इकोसिस्टम की दिशा में एक व्यापक पहल है, जिसका उद्देश्य ड्राइवरों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए संतुलित और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

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