स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा विस्तार: डॉक्टरों की भर्ती में तेजी के निर्देश, दो वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों के साथ सरकार ने आगामी तीन वर्षों की कार्ययोजना रखी

G7PoAknbMAApdc9

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए आज लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को विभागीय डॉक्टर्स की भर्ती अतिशीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए गए। सरकार का मानना है कि प्रदेश में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पतालों में विस्तार कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पर्याप्त डॉक्टरों की उपलब्धता अनिवार्य है। इसी के अंतर्गत भर्ती प्रक्रियाओं में गति लाने और रिक्त पदों को प्राथमिकता के साथ भरने की योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

पिछले दो वर्षों में राज्य की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज हुई है। प्रदेश में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या 14 से बढ़कर 19 और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो गई है, जिससे मेडिकल शिक्षा का दायरा और बड़ा हुआ है। गंभीर परिस्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से 109 गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट कर जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध कराया गया। साथ ही, मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में तीन नए जिला चिकित्सालयों की स्वीकृति ने स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण में अहम भूमिका निभाई है।

इसी अवधि में इंदौर स्थित केंद्र सरकार के ESIC चिकित्सा महाविद्यालय में 50 सीटों का संचालन प्रारंभ हुआ। देह दान करने वाले 38 मृतकों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर राज्य सरकार ने अंगदान एवं देहदान को सम्मान की परंपरा को बढ़ावा दिया। चिकित्सा महाविद्यालयों में 354 सीनियर रेज़िडेंट पदों का सृजन किया गया और भोपाल मेडिकल कॉलेज में 4 नए विभाग स्थापित किए गए। इसके साथ-साथ पांच जिला अस्पतालों का उन्नयन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 800 नए बिस्तरों की वृद्धि और 810 नए पदों की स्वीकृति मिली।

इसी क्रम में जिले स्तर पर एकीकृत उपचार केन्द्रों की स्थापना की गई। भोपाल और इंदौर में दो “सेंटर ऑफ कॉम्पीटेंस” स्थापित हुए, जबकि प्री-नेटल जांच सुविधा के लिए रीवा मेडिकल कॉलेज में “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” शुरू हुआ।

सरकार ने आगामी तीन वर्षों के लिए विस्तृत स्वास्थ्य कार्ययोजना भी प्रस्तुत की है। इसमें CM-CARE योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, 2028 तक 6 निर्माणाधीन सरकारी मेडिकल कॉलेजों के संचालन प्रारंभ करने, पीपीपी मॉडल में 13 नए मेडिकल कॉलेज चलाने का लक्ष्य शामिल है। मेडिकल शिक्षा में सुधार के लिए MBBS में 2000 और MD/MS में 500 नई सीटें बढ़ाने की योजना है। इसके साथ ही राज्यभर में 500 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को क्रियाशील बनाया जाएगा और सभी संभागीय मुख्यालयों में MRI सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी।

सरकार का उद्देश्य है कि अधिकतम नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिल सके। फील्ड स्तर पर प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के सुचारू संचालन के लिए निजी चिकित्सकों की सेवाएं लेने का भी निर्णय लिया गया है, जिसे उपयुक्त मानदेय दिया जाएगा।

मध्यप्रदेश सरकार का दावा है कि यह कार्ययोजना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में तेजी से सुधार लाएगी और प्रदेश को बेहतर स्वास्थ्य अवसंरचना प्रदान करेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed