असम बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़ा राहत पैकेज, हर परिवार की मदद,

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असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए राज्य सरकार ने राहत और पुनर्वास के काम को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक सरकार की ओर से घोषित राहत उपायों को जल्द से जल्द पहुंचाया जा रहा है। सरकार का फोकस तत्काल सहायता देने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए घोषित सभी राहत उपायों को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि जिन परिवारों को मदद की जरूरत है, उन्हें समय पर आर्थिक सहायता और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि राहत और पुनर्वास के काम में किसी तरह की देरी नहीं होने दी जाएगी।

असम सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन शुरू करने की तारीख भी तय कर दी है। प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन 9 अगस्त से शुरू होगा। इसके आधार पर प्रभावित परिवारों और संपत्तियों को हुए नुकसान का विवरण तैयार किया जाएगा, जिससे आगे की सहायता और पुनर्वास योजनाओं को लागू करने में मदद मिलेगी।

राहत पैकेज के तहत पात्र बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल जरूरतों को पूरा करने के लिए 15 हजार रुपये की अंतरिम वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके अलावा ओरुनोदोई योजना के तहत मिलने वाली सहायता को एक महीने के लिए बढ़ाकर 2500 रुपये किया गया है। सबसे ज्यादा प्रभावित शिवसागर और चराइदेव जिलों के परिवारों के लिए सरकार ने 10 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता देने का भी फैसला किया है।

बाढ़ के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए भी सरकार ने आर्थिक मदद का ऐलान किया है। मृतकों के परिजनों को बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट की अनिवार्यता के 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी। इस कदम से उन परिवारों को तत्काल आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है, जिन्होंने बाढ़ के कारण अपने परिवार के सदस्य को खो दिया है।

बाढ़ प्रभावित लोगों को कर्ज और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियों में भी राहत दी गई है। सरकार ने लोन की किस्त चुकाने के लिए छह महीने की मोहलत देने के साथ लोन की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। प्रभावित परिवारों के बिजली बिल और जमीन के लगान यानी खजाने को भी माफ करने की घोषणा की गई है। इससे बाढ़ के कारण आर्थिक संकट झेल रहे परिवारों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

शिक्षा व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए भी सरकार ने विशेष प्रावधान किए हैं। बाढ़ के कारण जिन छात्रों की किताबें खराब हो गई हैं, उन्हें नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए सहायता दी जाएगी। स्कूल यूनिफॉर्म दोबारा उपलब्ध कराने के साथ-साथ जरूरी प्रमाणपत्रों की डुप्लिकेट कॉपी भी प्रभावित छात्रों को मुफ्त में दिलाने की व्यवस्था की जाएगी।

इसके अलावा बाढ़ से क्षतिग्रस्त आंगनवाड़ी केंद्रों और नामघरों के पुनर्निर्माण के लिए भी सहायता दी जाएगी। प्रत्येक क्षतिग्रस्त नामघर के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपये की सहायता निर्धारित की गई है।

असम में हाल की बाढ़ ने बड़े इलाके को प्रभावित किया है। राज्य के 15 जिलों में 1.68 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं। प्रभावित इलाकों में राहत शिविर, वितरण केंद्र और बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि राहत के साथ-साथ पुनर्वास पर भी लगातार काम किया जा रहा है, ताकि बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित परिवार जल्द से जल्द सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

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