पटना पुस्तक मेला का भव्य आगाज़, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया उद्घाटन; 200 स्टॉल और 6 लाख दर्शकों के आने की संभावना

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 41वें पुस्तक मेला का शुभारंभ किया। 5 दिसंबर से 16 दिसंबर तक चलने वाले इस वार्षिक आयोजन में इस बार करीब 200 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें बिहार सहित देशभर के 80 प्रकाशन संस्थान हिस्सा ले रहे हैं। सीआरडी द्वारा आयोजित यह मेला पिछले चार दशकों से पटना की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण किया और पुस्तकों का निरीक्षण किया। मेले में साहित्य, राजनीति, इतिहास, विज्ञान और बच्चों के लिए विशेष श्रेणियों सहित विविध प्रकार की पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। यहां बिहार के प्रमुख राजनेताओं, जिनमें लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार पर आधारित पुस्तकों का भी आकर्षक संकलन दर्शकों को देखने को मिलेगा।
इस बार मेले का सबसे बड़ा आकर्षण है—दुनिया का सबसे महंगा छपा हुआ ग्रंथ ‘मैं’, जिसे लेखक रत्नेश्वर ने रचा है। इसकी कीमत 15 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हिंदी और अंग्रेज़ी, दोनों भाषाओं में प्रदर्शित यह ग्रंथ मेले में सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। पुस्तक मेला संयोजक अमित झा ने बताया कि दुनिया के किसी भी पुस्तक मेले में इतने महंगे ग्रंथ की प्रदर्शनी पहली बार लगी है। इसके साथ सेल्फी लेने के लिए भी पुस्तक प्रेमियों की भीड़ उमड़ रही है।
आयोजकों का अनुमान है कि इस बार मेले में करीब 6 लाख दर्शकों के पहुंचने की संभावना है। मेले के तीनों प्रमुख प्रवेश द्वारों पर टिकट काउंटर बनाए गए हैं, जबकि स्कूल यूनिफॉर्म में आए बच्चों के लिए प्रवेश निःशुल्क रहेगा। इसके अलावा सोमवार से शुक्रवार तक कॉलेज के छात्रों के लिए भी फ्री टिकट की व्यवस्था की गई है।
मेले में साहित्य प्रेमियों के लिए एक विशेष व्यास मंच भी तैयार किया गया है, जहां प्रतिदिन देश और बिहार के नामचीन साहित्यकार, कवि, लेखक, डॉक्टर, समाजसेवी और बुद्धिजीवी उपस्थित रहेंगे और विभिन्न विषयों पर परिचर्चा करेंगे। इसके साथ मनोरंजन, झांकी, नाटक और फूड स्टॉल भी मेले को आकर्षक और परिवारोन्मुख बना रहे हैं।
