प्रशांत किशोर बोले- नई पार्टी को मिल रहा जबरदस्त समर्थन, दो करोड़ लोगों ने कराया पंजीकरण

बिहार की राजनीति में एक बार फिर चुनावी हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने अपनी नई राजनीतिक पहल को लेकर बड़ा दावा किया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी तथाकथित पार्टी को लेकर लोगों के बीच काफी उत्साह देखने को मिल रहा है और इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंटरनेट पर अभियान शुरू होने के कुछ ही समय के भीतर लगभग दो करोड़ लोगों ने पंजीकरण कराया है। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और लोग अब पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प तलाश रहे हैं। उनका मानना है कि बिहार सहित देश के कई हिस्सों में लोग ऐसी राजनीतिक व्यवस्था चाहते हैं जो सीधे जनता के मुद्दों पर काम करे। उन्होंने कहा कि उनकी पहल को युवाओं, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और ग्रामीण क्षेत्रों से भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। बड़ी संख्या में लोगों का ऑनलाइन जुड़ना इस बात का संकेत है कि जनता राजनीतिक बदलाव को लेकर गंभीर है।
उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल माध्यम आज राजनीति का बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए लोग तेजी से किसी भी अभियान से जुड़ रहे हैं। उनका कहना था कि तकनीक के इस दौर में जनता तक पहुंचना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है और लोग भी खुलकर अपनी राय सामने रख रहे हैं। इसी वजह से उनकी राजनीतिक पहल को कम समय में व्यापक पहचान मिली है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि प्रशांत किशोर का यह बयान आने वाले चुनावों को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। पिछले कुछ समय से वे लगातार बिहार के अलग-अलग जिलों में जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं। गांवों और कस्बों में आयोजित बैठकों के जरिए वे शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पलायन जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। इसी कारण युवाओं के बीच उनकी चर्चा तेजी से बढ़ी है।
प्रशांत किशोर ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि उनकी राजनीतिक सोच पारंपरिक दलों से अलग होगी। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल वादों से संतुष्ट नहीं है बल्कि उन्हें जमीन पर बदलाव चाहिए। उन्होंने दावा किया कि लोग मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था से परेशान हैं और एक नए विकल्प की तलाश कर रहे हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग उनकी पहल के साथ जुड़ रहे हैं।
हालांकि राजनीतिक विरोधी उनके दावों पर सवाल भी उठा रहे हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि केवल ऑनलाइन पंजीकरण से राजनीतिक ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इसके बावजूद यह साफ है कि प्रशांत किशोर की राजनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है और उनके अभियान को लेकर लोगों में जिज्ञासा बनी हुई है।
बिहार की राजनीति में लंबे समय से पारंपरिक दलों का दबदबा रहा है, लेकिन अब नई राजनीतिक ताकतों और नए चेहरों की एंट्री से समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर का यह दावा आने वाले समय में राजनीतिक बहस को और तेज कर सकता है। खासकर युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं के बीच उनकी लोकप्रियता को लेकर चर्चा बढ़ती जा रही है।
