पश्चिम एशिया के तनाव पर लोकसभा में हंगामा, विपक्ष के विरोध के बीच दोपहर 3 बजे तक स्थगित हुई कार्यवाही

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संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार को लोकसभा में तीखी नोकझोंक और हंगामे के साथ हुई। कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा, जिसके कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही और अंततः इसे दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

सुबह करीब 11 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी सांसदों ने ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष और उसके भारत पर संभावित प्रभाव को लेकर सरकार से तत्काल स्पष्टीकरण की मांग की। विपक्ष का कहना था कि इस तनाव का असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को सदन में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने प्रश्नकाल की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश की और संबंधित मंत्रियों को अपने विभागों से जुड़े सवालों के जवाब देने के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री सुरेश गोपी, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और सड़क परिवहन से जुड़े प्रश्नों पर मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने अपने-अपने विभागों से जुड़े सवालों के जवाब दिए। हालांकि विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे, जिससे सदन का माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

दोपहर करीब 12 बजे जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो विपक्ष का विरोध और तेज हो गया। विपक्षी सांसदों ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर भारत की आधिकारिक नीति क्या है और वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

इस दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने भी सदन में इस मुद्दे को उठाया और सरकार से भारत के रुख को स्पष्ट करने की मांग की। इस पर पीठासीन अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशंकर इस विषय पर सदन को विस्तृत जानकारी देने वाले हैं और सदस्यों को उनकी बात ध्यान से सुननी चाहिए। इसके बावजूद कांग्रेस सहित कई विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी और सरकार से तत्काल विस्तृत जवाब देने की मांग करते रहे।

हंगामे के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत सरकार पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं और विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए सरकार तैयार है।

सदन में लगातार जारी शोर-शराबे के बीच पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने कई बार विपक्षी सांसदों से शांत रहने और सरकार की बात सुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री ने स्थिति स्पष्ट कर दी है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है।

इसी दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष खुद तय नहीं कर पा रहा है कि वह आखिर चाहता क्या है। उनके अनुसार पहले लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया और फिर कार्यवाही स्थगित करने की मांग की जा रही है।

पीठासीन अधिकारी ने भी विपक्षी सदस्यों से कहा कि यदि वे लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा चाहते हैं तो सदन इसके लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है।

हालांकि लगातार जारी हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और अंततः पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर तीन बजे तक के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी।

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