एलपीजी आवंटन का नया फॉर्मूला लागू: उद्योगों को राहत, सरकार ने तय किए सख्त नियम

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केंद्र सरकार ने एलपीजी आवंटन को लेकर एक नया फॉर्मूला लागू किया है, जिसका उद्देश्य देश के अहम औद्योगिक क्षेत्रों को राहत देना और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करना है। इस नई व्यवस्था के तहत फार्मा, फूड, कृषि और कई अन्य महत्वपूर्ण सेक्टर्स को प्राथमिकता के आधार पर एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उत्पादन गतिविधियों में किसी तरह की बाधा न आए और आर्थिक गति बनी रहे।

सरकार के इस फैसले के अनुसार, विभिन्न उद्योगों को उनकी पिछली खपत के आधार पर एलपीजी का आवंटन किया जाएगा। मार्च 2026 से पहले की खपत को आधार मानते हुए कंपनियों को करीब 70 प्रतिशत एलपीजी उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि, इसके साथ एक कुल सीमा भी तय की गई है ताकि संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित हो सके। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और आपूर्ति को सुव्यवस्थित करना आवश्यक हो गया है।

नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन उद्योगों में एलपीजी का उपयोग अनिवार्य है और उसकी जगह प्राकृतिक गैस का उपयोग संभव नहीं है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इससे उन इकाइयों को राहत मिलेगी जो अपनी उत्पादन प्रक्रिया में एलपीजी पर पूरी तरह निर्भर हैं। वहीं जिन उद्योगों में पाइप्ड नेचुरल गैस का विकल्प उपलब्ध है, उन्हें धीरे-धीरे इस दिशा में स्थानांतरित होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

सरकार ने उद्योगों के लिए कुछ शर्तें भी तय की हैं। कंपनियों को तेल विपणन कंपनियों के साथ पंजीकरण कराना होगा और साथ ही सिटी गैस वितरण कंपनियों के पास पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन करना होगा। हालांकि, जहां तकनीकी कारणों से एलपीजी का विकल्प नहीं है, वहां इस शर्त में छूट दी गई है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संसाधनों का उपयोग जरूरत के अनुसार हो और अनावश्यक दबाव न बने।

राज्यों को भी इस नई व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा गया है। सरकार ने पहले ही राज्यों को नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा आवंटित कर दिया है और अतिरिक्त प्रोत्साहन के रूप में सुधार आधारित कोटा भी तय किया गया है। जिन राज्यों द्वारा निर्धारित सुधारों को लागू किया जाएगा, उन्हें अतिरिक्त आवंटन का लाभ मिलेगा। इसके तहत राज्यों को गैस वितरण से जुड़े नए नियमों को लागू करने, सुधार योजनाओं का लाभ उठाने और कंप्रेस्ड बायो गैस नीति को जल्द लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच छोटे सिलेंडरों की मांग में भी तेजी देखी गई है, जो इस बात का संकेत है कि एलपीजी की पहुंच और उपयोग लगातार बढ़ रहा है। हाल के दिनों में 5 किलोग्राम वाले सिलेंडरों की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि छोटे उपभोक्ताओं और व्यवसायों के बीच इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। जागरूकता अभियानों के जरिए भी लोगों को इसके उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

कुल मिलाकर सरकार का यह कदम ऊर्जा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, औद्योगिक विकास को समर्थन देने और वैकल्पिक ईंधनों की ओर संतुलित बदलाव को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे न केवल उद्योगों को राहत मिलेगी बल्कि ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता भी बनी रहेगी।

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