किसानों की आमदनी बढ़ाने पर बड़ा फोकस, काजू–कोको से लेकर पशुपालन और एग्रीटेक तक कई

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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए कई दूरगामी घोषणाएं कीं। बजट में भारत को कच्चे काजू और कोको के उत्पादन व प्रसंस्करण में आत्मनिर्भर बनाने, निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और भारतीय काजू तथा भारतीय कोको को वर्ष 2030 तक प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने के लिए एक समर्पित राष्ट्रीय कार्यक्रम की घोषणा की गई।

वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय चंदन इकोसिस्टम के गौरव को पुनर्स्थापित करने के लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर केंद्रित खेती और कटाई के बाद प्रसंस्करण को बढ़ावा देगी। इसके साथ ही पुराने और कम उपज देने वाले बागानों को फिर से हरा-भरा करने तथा अखरोट, बादाम और खुमानी जैसी गिरीदार फसलों की उच्च घनत्व खेती का विस्तार करने के लिए भी एक विशेष कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ युवाओं की भागीदारी से कृषि में मूल्यवर्धन को प्रोत्साहित करना है।

बजट भाषण में निर्मला सीतारमण ने सरकार के तीसरे कर्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सबका साथ, सबका विकास के विजन के अनुरूप प्रत्येक परिवार, समुदाय, क्षेत्र और सेक्टर को संसाधनों, सुविधाओं और अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों की उत्पादकता बढ़ाने, उद्यमिता के जरिए उनकी आमदनी में वृद्धि करने, दिव्यांगजनों को आजीविका और प्रशिक्षण के माध्यम से सशक्त बनाने तथा मानसिक स्वास्थ्य और ट्रॉमा देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लक्षित प्रयास किए जाएंगे।

किसानों की आय बढ़ाने के व्यापक लक्ष्य के तहत बजट में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों के एकीकृत विकास, तटीय क्षेत्रों में मत्स्य मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और स्टार्टअप व महिला-प्रेरित समूहों को मत्स्य कृषक उत्पादक संगठनों के साथ जोड़कर बाजार से जोड़ने के प्रावधान किए गए हैं।

वित्त मंत्री ने पशुपालन को किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजन के लिए पशुपालन क्षेत्र को उद्यमिता विकास के तहत विशेष सहायता दी जाएगी। इसके अंतर्गत ऋण आधारित सब्सिडी, पशुधन उद्यमों का आधुनिकीकरण, डेयरी और मुर्गीपालन के लिए सशक्त मूल्य श्रृंखला का निर्माण और पशुधन कृषक उत्पादक संगठनों को बढ़ावा दिया जाएगा।

बजट 2026-27 में उच्च मूल्य वाली खेती पर भी जोर दिया गया है। तटीय क्षेत्रों में नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी फसलों को सहायता दी जाएगी, जबकि पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों में बादाम, काजू और खुमानी जैसे गिरीदार फलों को प्रोत्साहन मिलेगा। वित्त मंत्री ने बताया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक है और लगभग तीन करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए नारियल पर निर्भर हैं। नारियल उत्पादन में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए पुराने और गैर-उत्पादक पेड़ों को नई किस्मों से बदलने सहित उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की योजना पेश की गई है।

इसके अलावा बजट में भारत-विस्तार नामक एक नई पहल की भी घोषणा की गई है, जिसे कृषि संसाधनों तक पहुंच के लिए एक आभासी और एकीकृत प्रणाली के रूप में विकसित किया जाएगा। यह एक बहुभाषी एआई आधारित प्लेटफॉर्म होगा, जिसे एग्रीस्टेक पोर्टल और आईसीएआर पैकेज के साथ जोड़ा जाएगा। इससे कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को बेहतर सलाह देने और जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर बजट 2026-27 में सरकार ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि किसान, कृषि नवाचार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रहेंगे।

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