पटना में ऐतिहासिक क्षण: नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, एनडीए के 26 मंत्रियों ने भी संभाली जिम्मेदारी

पटना का गांधी मैदान गुरुवार को एक बार फिर ऐतिहासिक राजनीतिक घटना का साक्षी बना, जब जेडीयू नेता नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। एनडीए की प्रचंड जीत और बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इस नई सरकार का गठन हुआ है। शपथ ग्रहण समारोह की भव्यता और राजनीतिक महत्त्व को उस समय और बल मिला, जब मंच पर मुख्यमंत्री के साथ गठबंधन के सभी प्रमुख दलों के नेता मौजूद रहे।
राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री के बाद क्रमशः भाजपा के वरिष्ठ नेताओं सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके अलावा एनडीए के पाँच घटक दलों—भाजपा, जदयू, लोजपा(रा), रालोमो और हम—के कुल 26 मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री के साथ ही 26 सदस्यीय मंत्रिमंडल ने भी शपथ ली। इनमें भाजपा के 14, जदयू के 8, चिराग पासवान की पार्टी लोजपा(रा) के 2, और अन्य दलों से 1–1 मंत्री शामिल हैं। इस बार मंत्रिमंडल में एक मुस्लिम चेहरा भी शामिल किया गया है, जो राजनीतिक संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस बार के मंत्रिमंडल में 10 नए चेहरे शामिल किए गए हैं, जिनके माध्यम से जातिगत संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को विशेष तवज्जो दी गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एनडीए ने अपने सामाजिक आधार को और मजबूत करने तथा सभी वर्गों में समावेशी प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तहत मंत्रिमंडल का गठन किया है।
शपथ ग्रहण समारोह में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। कुल तीन महिलाओं ने मंत्री पद की शपथ ली। जेडीयू की वरिष्ठ नेता लेशी सिंह को एक बार फिर मंत्री बनाया गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज और जमुई से दूसरी बार विधायक चुनी गई श्रेयसी सिंह को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। तीसरी महिला मंत्री रमा निषाद हैं, जो भाजपा से पहली बार विधायक बनी हैं और मुजफ्फरपुर जिले के औराई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन तीनों महिलाओं की नियुक्ति को सरकार के सामाजिक और राजनीतिक संतुलन की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
मंच पर मौजूद राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और हजारों नागरिकों ने पूरे आयोजन को उत्सव जैसा रूप दे दिया। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही और पूरे गांधी मैदान में व्यापक पुलिस बल और निगरानी तैनात थी। समारोह में एनडीए के प्रमुख नेताओं के अलावा कई सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
नई सरकार के गठन के साथ ही अब नीतीश कुमार के सामने प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बड़ी जिम्मेदारियाँ हैं। राज्य में कानून-व्यवस्था को दुरुस्त रखना, विकास परियोजनाओं को गति देना, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाना तथा चुनावी वादों को जमीन पर उतारना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होगा। गठबंधन राजनीति की जटिलताओं के बीच तालमेल बनाए रखना भी आने वाले दिनों में एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी।
