बिहार में रोजगार का महाअभियान तेज, नई सरकार का लक्ष्य अगले पाँच वर्षों में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार

बिहार में नई सरकार के गठन के बाद रोजगार और सरकारी नौकरी को लेकर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को नौकरी और रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की पहली प्राथमिकता है। सात निश्चय-2 के तहत वर्ष 2020 से 2025 के बीच बिहार के लगभग 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जो राज्य के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
सरकार अब अगले पांच वर्षों (2025–30) के लिए और भी बड़ा लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है। इस अवधि में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का भविष्य युवाओं पर निर्भर है और इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार युवाओं को अधिक अवसर देने के लिए लगातार प्रयासरत है।
नई सरकार के गठन के तुरंत बाद ही विभिन्न विभागों में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। सरकार ने राज्य के सभी प्रशासी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्तों, पुलिस मुख्यालय से लेकर सभी जिलाधिकारियों तक को निर्देश जारी किया है कि वे 31 दिसंबर 2025 तक अपनी-अपनी रिक्तियों की अधियाचना सामान्य प्रशासन विभाग को अनिवार्य रूप से भेज दें। इससे नौकरी से संबंधित सभी प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और चयन आयोग समय पर परीक्षाएँ आयोजित कर सकेंगे।
सामान्य प्रशासन विभाग को निर्देशित किया गया है कि वह प्राप्त अधियाचनाओं की जल्द जांच कर उन्हें विभिन्न नियुक्ति आयोगों को भेज दे, ताकि विज्ञापन से लेकर परीक्षा और परिणाम तक की प्रक्रिया में देरी न हो। इसी क्रम में सभी नियुक्ति आयोगों और चयन एजेंसियों को आदेश दिया गया है कि वे जनवरी 2026 में पूरे वर्ष का विस्तृत भर्ती कैलेंडर जारी करें, जिसमें विज्ञापन की तारीख, परीक्षा की संभावित अवधि, और अंतिम परिणाम जारी करने की निर्धारित तिथि का स्पष्ट उल्लेख हो।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में किसी भी भर्ती प्रक्रिया को विज्ञापन से अंतिम परिणाम तक एक वर्ष से अधिक नहीं चलना चाहिए। इसके लिए आयोगों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे समयबद्ध तरीके से पूरी प्रक्रिया संचालित करें।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सभी नियुक्ति आयोगों को परीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत और सुरक्षित बनाने के निर्देश दिए हैं। अनियमितता या नकल के मामलों में दोषियों पर तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सज़ा दिलाने का आदेश भी जारी किया गया है।
बिहार में बढ़ती परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए CBT (कंप्यूटर आधारित परीक्षा) केंद्रों की संख्या बढ़ाने का निर्णय भी लिया गया है, जिससे परीक्षाएँ समय पर और सुचारू रूप से आयोजित की जा सकेंगी।
सरकार का कहना है कि बिहार के युवाओं को आत्मनिर्भर और दक्ष बनाने के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन, कौशल विकास और सरकारी नियुक्तियों को गति दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने पुनः दोहराया कि राज्य सरकार युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षित करियर के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
