पांच राज्यों और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, 9 से 29 अप्रैल के बीच मतदान, 4 मई को आएंगे नतीजे

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चुनाव आयोग ने रविवार को देश के पांच राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में आदर्श आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। चुनाव आयोग ने विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव से जुड़ी तैयारियों और व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी साझा की।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि चुनाव आयोग की टीम ने पिछले कुछ दिनों के दौरान सभी चुनावी राज्यों का दौरा कर वहां की तैयारियों का विस्तृत जायजा लिया। इस दौरान आयोग ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और मतदाताओं से बातचीत कर चुनाव प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव भी लिए। आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों, राज्य निर्वाचन अधिकारियों और पुलिस महानिदेशकों के साथ भी विस्तृत बैठकें कीं ताकि चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराए जा सकें।

घोषित कार्यक्रम के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव एक ही चरण में 9 अप्रैल को कराए जाएंगे। वहीं पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा, जिसकी पहली तारीख 23 अप्रैल और दूसरी 29 अप्रैल तय की गई है। तमिलनाडु में भी एक चरण में 23 अप्रैल को मतदान कराया जाएगा। इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

चुनाव आयोग ने बताया कि इन सभी चुनावों के लिए कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। मतदान के संचालन के लिए लगभग 25 लाख चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करीब 8.50 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि मतदान शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में हो सके।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि ये सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इसलिए चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह साफ और सटीक हो सके। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी पात्र मतदाता वोट देने से वंचित न रहे और कोई अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो पाए।

चुनाव आयोग के अनुसार इन चुनावों में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह संख्या कई बड़े देशों की कुल आबादी के बराबर बताई जा रही है। पश्चिम बंगाल में लगभग 6.44 करोड़ मतदाता हैं, जबकि असम में करीब 2.5 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे।

चुनाव प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेष व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। कई स्थानों पर पिंक बूथ बनाए जाएंगे जहां मतदान की पूरी जिम्मेदारी महिला कर्मियों द्वारा संभाली जाएगी। इसके अलावा मतदान के बाद तुरंत मतदान प्रतिशत की जानकारी भी जारी की जाएगी। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदान केंद्रों के अंदर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी और मतदाताओं को अपने फोन बूथ के बाहर ही रखने होंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने युवाओं और पहली बार मतदान करने जा रहे मतदाताओं से खास अपील करते हुए कहा कि वे अपने मताधिकार का इस्तेमाल गर्व और जिम्मेदारी के साथ करें। उनका कहना था कि वोट लोकतंत्र में नागरिक की आवाज होता है और हर मतदाता को इसे पूरी जिम्मेदारी के साथ प्रयोग करना चाहिए।

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