एशियाई खेलों में सुरुचि और कमलजीत ने निशानेबाजी में रचा इतिहास, नया रिकॉर्ड बनाकर भारत को दिलाया गोल्ड मेडल

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एशियाई खेलों की निशानेबाजी स्पर्धा में भारत के एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में भारतीय निशानेबाज सुरुचि इंदर सिंह और कमलजीत की जोड़ी ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए देश के लिए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही अपनी पकड़ बनाए रखी और उच्च दबाव वाली परिस्थितियों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया।

एशियाई रिकॉर्ड तोड़कर जीता गोल्ड मेडल भारतीय जोड़ी की यह जीत इसलिए भी बेहद खास रही क्योंकि उन्होंने फाइनल में 484.6 अंक का ऐतिहासिक स्कोर हासिल किया। यह अंक तालिका में एक नया एशियाई रिकॉर्ड है। इससे पहले यह रिकॉर्ड 481.3 अंक का था, जिसे उज्बेकिस्तान की जोड़ी ने दर्ज किया था। भारतीय खिलाड़ियों ने सटीक निशानेबाजी और बेहतरीन निरंतरता के बल पर पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक पर अपना कब्जा जमाया।

प्रतिद्वंद्वी टीमों को पछाड़कर बनाई बढ़त खिताबी मुकाबले में दक्षिण कोरिया की टीम 478.0 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर रही और उसने रजत पदक जीता। वहीं ईरान की जोड़ी ने 415.8 अंक हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके अलावा इंडोनेशिया की टीम चौथे स्थान पर रही। पूरे मैच के दौरान भारतीय जोड़ी ने दबाव में भी संयम बनाए रखा और अपने प्रतिद्वंद्वियों को आगे निकलने का कोई मौका नहीं दिया।

क्वालिफिकेशन दौर में भी कायम किया नया कीर्तिमान फाइनल से पहले क्वालिफिकेशन चरण में भी सुरुचि और कमलजीत का दबदबा देखने को मिला था। क्वालिफिकेशन राउंड में इस जोड़ी ने 587 अंक दर्ज करके एशियाई खेलों का पिछला रिकॉर्ड तोड़ दिया। इसके साथ ही उनका यह प्रदर्शन पहले बनाए गए एशियाई रिकॉर्ड के बराबर भी पहुंच गया। इस शानदार निरंतरता ने दिखा दिया कि भारतीय निशानेबाज हर स्तर पर पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरे हैं।

भारतीय निशानेबाजी दल के लिए गौरव का क्षण मिश्रित टीम स्पर्धाओं में दोनों खिलाड़ियों के बीच का तालमेल और सटीकता बेहद मायने रखती है। सुरुचि और कमलजीत ने हर शॉट में एक-दूसरे का बेहतरीन साथ दिया। इलेक्ट्रॉनिक स्कोरबोर्ड पर अंतिम परिणाम आते ही भारतीय दल में खुशी की लहर दौड़ गई। इस स्वर्ण पदक ने नागोया में भारत के पदकों की संख्या में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी है, जिससे महाद्वीपीय स्तर पर भारत की खेल साख और मजबूत हुई है।

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