एशियन गेम्स नीरू ढांडा ने रचा इतिहास, महिलाओं की ट्रैप शूटिंग में भारत को मिला रिकॉर्ड तोड़ पांचवां गोल्ड मेडल

एशियन गेम्स में भारतीय निशानेबाजी का स्वर्णिम सफर
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है और देश के पदकों की सूची में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है। निशानेबाजी के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही नीरू ढांडा ने महाद्वीपीय खेलों में भारत के लिए पांचवां स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। अपने करियर के पहले एशियन गेम्स में भाग ले रही नीरू ने महिलाओं की ट्रैप इंडिविजुअल स्पर्धा में ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो इससे पहले कोई अन्य भारतीय महिला खिलाड़ी नहीं कर पाई थी। उन्होंने न केवल इस स्पर्धा का गोल्ड मेडल अपने नाम किया, बल्कि एक नया एशियन रिकॉर्ड भी कायम किया।
क्वालीफिकेशन से लेकर फाइनल तक का शानदार दबदबा
प्रतियोगिता की शुरुआत से ही नीरू ढांडा काफी मजबूत स्थिति में नजर आ रही थीं। क्वालीफिकेशन राउंड में उन्होंने 118 का बेहतरीन स्कोर बनाकर तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया और फाइनल के लिए अपना दावा मजबूती से ठोका। जब वह फाइनल मुकाबले में उतरीं तो उनके एकाग्रता और सटीक निशानों ने सभी को प्रभावित किया। फाइनल में 28 के रिकॉर्ड स्कोर के साथ उन्होंने शीर्ष स्थान प्राप्त किया और एशियन गेम्स के इतिहास में ट्रैप शूटिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं। इसके साथ ही वह इस व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट भी बनीं।
मुकाबले का रोमांच और जबरदस्त वापसी का प्रदर्शन
फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक और उतार-चढ़ाव से भरा रहा। नीरू ने मुकाबले की शुरुआत से ही अपनी पकड़ बनाए रखी, हालांकि नौवें शॉट पर उनका पहला निशाना चूक गया। इस एकमात्र गलती के कारण वह तालिका में थोड़े समय के लिए तीसरे स्थान पर खिसक गईं। लेकिन नीरू ने दबाव में भी अपने संयम को खोने नहीं दिया और अगली ही सीरीज में धमाकेदार वापसी की। उन्होंने तीसरी और चौथी सीरीज में परफेक्ट हिट्स लगाए और बीस शॉट्स के बाद 19 सटीक निशानों के साथ दोबारा पहले स्थान पर कब्जा कर लिया।
गोल्ड मेडल जीतने का सफर और अंतिम दौर की रणनीति
मुकाबले के अंतिम पड़ाव में नीरू की रणनीति और मानसिक मजबूती साफ झलकी। पांचवीं सीरीज में एक और शॉट मिस होने के बावजूद उन्होंने अपनी बढ़त बनाए रखी और गोल्ड की दौड़ में सबसे आगे रहीं। इसके बाद आखिरी चरण में उन्होंने एक के बाद एक लगातार पांच सटीक निशाने लगाकर स्वर्ण पदक पर अपनी मुहर लगा दी। अपने पहले एशियन गेम्स में उन्होंने पूरी स्पर्धा के दौरान कुल तीस शॉट्स में से केवल दो निशाने मिस किए। उनके इस अनुशासन और क्लास ने प्रतिद्वंद्वियों को आगे निकलने का कोई मौका नहीं दिया।
विपक्षी खिलाड़ियों को पछाड़कर बनाया एशियाई रिकॉर्ड
इस ऐतिहासिक मुकाबले में नीरू ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के शीर्ष निशानेबाजों को पीछे छोड़ा। चीन की युनोंग सन ने 26 के स्कोर के साथ रजत पदक पर कब्जा जमाया, जबकि कुवैत की निशानेबाज ने 21 के स्कोर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। निशानेबाजी में भारत का यह इस बार का दूसरा स्वर्ण पदक है, जबकि आइची-नागोया में चल रहे इन खेलों में भारत की कुल स्वर्ण पदकों की संख्या अब पांच हो गई है। नीरू के इस रिकॉर्ड प्रदर्शन ने भारतीय निशानेबाजी के भविष्य को एक नई दिशा दी है।
टीम इवेंट में भी चमका भारतीय निशानेबाजों का सितारा
व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने से पहले भी नीरू ढांडा ने आज भारत की झोली में एक पदक डाला था। उन्होंने अपनी साथी खिलाड़ियों आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर महिलाओं की ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता था। तीन दिनों तक चले इस 125-शॉट वाले क्वालीफिकेशन दौर में भारतीय टीम ने कुल 328 का मजबूत स्कोर बनाया और कुवैत की कड़ी चुनौती को पीछे छोड़ते हुए सिल्वर मेडल अपने नाम किया। एक ही दिन में दो बड़े पदक जीतकर नीरू ने खेलों के इस संस्करण को अपने लिए यादगार बना दिया है।
