एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला स्क्वैश टीम ने जीता ब्रॉन्ज मेडल, सेमीफाइनल में हांगकांग से मिली कड़ी टक्कर

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। स्क्वैश के कोर्ट से भारत के लिए एक और खुशखबरी सामने आई है, जहां भारतीय महिला स्क्वैश टीम ने अपनी बेहतरीन खेल भावना और कड़े संघर्ष के बल पर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया है। हालांकि, टीम का सफर स्वर्ण पदक के मुकाबले से पहले सेमीफाइनल में ही थम गया। हांगकांग के खिलाफ खेले गए इस बेहद रोमांचक और सांसें रोक देने वाले मुकाबले में भारतीय टीम को 1-2 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बावजूद खिलाड़ियों के प्रदर्शन और जज्बे की चारों ओर तारीफ हो रही है।
अनाहत सिंह की शुरुआती बढ़त और फिर हांगकांग की वापसी
सेमीफाइनल मुकाबले का आगाज भारत के लिए काफी उम्मीदों भरा रहा। भारत की ओर से युवा खिलाड़ी अनाहत सिंह ने कोर्ट पर कदम रखा। उनके सामने हांगकांग की अनुभवी खिलाड़ी चान सिन युक थीं। अनाहत ने मैच की शुरुआत धमाकेदार अंदाज में की और विरोधी खिलाड़ी पर मानसिक दबाव बना दिया। उन्होंने पहला गेम 11-9 के बारीक अंतर से अपने नाम किया और फिर दूसरे गेम में भी अपने आक्रामक शॉट्स का जलवा दिखाते हुए 11-8 से जीत दर्ज की। लगातार दो गेम जीतकर अनाहत ने भारत को जीत की मजबूत दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया था।
चान सिन की शानदार वापसी और हांगकांग की बढ़त
दो गेम हारने के बाद हांगकांग की खिलाड़ी चान सिन युक ने असाधारण संयम और रणनीति का परिचय दिया। उन्होंने तीसरे गेम से अपने खेल की लय बदली और अनाहत पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। चान सिन ने तीसरा गेम 11-6 से आसानी से जीत लिया। इसके बाद चौथे और पांचवें गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच एक-एक अंक के लिए जबरदस्त होड़ देखने को मिली। चौथे गेम को 13-11 और निर्णायक पांचवें गेम को 12-10 से जीतकर चान सिन ने न केवल मैच जीता, बल्कि हांगकांग को मुकाबले में 1-0 की बढ़त दिला दी।
तन्वी खन्ना के जांबाज खेल ने लौटाई भारतीय उम्मीदें
पहला मैच गंवाने के बाद भारतीय टीम पर काफी दबाव आ गया था। ऐसे नाजुक मोड़ पर तन्वी खन्ना ने कोर्ट संभाला। उनके सामने अपने से काफी ऊंची रैंकिंग वाली खिलाड़ी ली का यी की चुनौती थी। मैच की शुरुआत तन्वी के लिए अच्छी नहीं रही और वे पहला गेम 4-11 से बुरी तरह हार गईं। लेकिन इसके बाद तन्वी ने जिस जज्बे के साथ वापसी की, उसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। तन्वी ने अपनी गलतियों से सबक लेते हुए अगले तीनों गेम 13-11, 11-9 और 13-11 से अपने नाम किए और मैच जीतकर कुल स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया।
निर्णायक मुकाबले में जोशना चिनप्पा की हार
स्कोर बराबर होने के बाद अंतिम और निर्णायक मैच पर सभी की निगाहें टिक गई थीं। भारत की ओर से अनुभवी स्टार खिलाड़ी जोशना चिनप्पा मैदान में उतरीं, जिनका सामना हांगकांग की हो त्जे लोक से था। हालांकि, इस अहम मैच में जोशना अपनी पुरानी लय में नजर नहीं आईं और विरोधी खिलाड़ी ने शुरुआत से ही उन पर शिकंजा कस लिया। हो त्जे ने पहला गेम 11-4 से एकतरफा अंदाज में जीता। इसके बाद जोशना ने दूसरे और तीसरे गेम में वापसी की कोशिश तो की, लेकिन हांगकांग की खिलाड़ी ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया और 11-7 व 11-9 से गेम जीतकर अपनी टीम को फाइनल में पहुंचा दिया।
स्क्वैश में भारत की झोली में आया चौथा पदक
भले ही भारतीय महिला टीम फाइनल का टिकट हासिल न कर सकी हो, लेकिन कांस्य पदक जीतकर उन्होंने देश का मान बढ़ाया है। एशियन गेम्स 2026 में स्क्वैश के खेल में भारत का यह कुल चौथा पदक है। इससे पहले भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी है। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में अभय सिंह और अनाहत सिंह ने देश के लिए रजत पदक जीते थे। वहीं, मिश्रित युगल स्पर्धा में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की जोड़ी ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक पर कब्जा जमाया था।
भारतीय खिलाड़ियों के जुझारूपन की सराहना
पूरे टूर्नामेंट में भारतीय महिला स्क्वैश टीम का प्रदर्शन काफी सराहनीय रहा है। युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के इस संतुलन ने कई मौकों पर देश को गौरवान्वित किया है। भले ही सेमीफाइनल का परिणाम पक्ष में न रहा हो, लेकिन तन्वी खन्ना की जुझारू वापसी और अनाहत सिंह के आक्रामक खेल ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय स्क्वैश का भविष्य बेहद सुरक्षित और उज्ज्वल है।
