पीवी सिंधु ने जीता हाइलो ओपन सुपर 500 का खिताब, फाइनल में डेनमार्क की खिलाड़ी को दी करारी शिकस्त

भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। सिंधु ने जर्मनी के सारब्रुकन में आयोजित हाइलो ओपन सुपर 500 बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इस सीजन की अपनी दूसरी बड़ी ट्रॉफी हासिल कर ली। रविवार को खेले गए फाइनल मुकाबले में उन्होंने डेनमार्क की खिलाड़ी लाइन होजमार्क केयर्सफेल्ट को सीधे गेमों में हराकर चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
सिंधु की इस जीत से भारतीय बैडमिंटन को बड़ी सफलता मिली है। खास बात यह है कि उन्होंने पूरे मुकाबले में शानदार नियंत्रण, आक्रामक खेल और बेहतरीन रणनीति का प्रदर्शन किया। 39 मिनट तक चले फाइनल में भारतीय खिलाड़ी ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को 21-12 और 21-14 से मात दी।
हाइलो ओपन फाइनल में सिंधु का शानदार प्रदर्शन
जर्मनी में आयोजित इस प्रतिष्ठित बैडमिंटन प्रतियोगिता के फाइनल में पीवी सिंधु का मुकाबला डेनमार्क की आठवीं वरीयता प्राप्त लाइन होजमार्क केयर्सफेल्ट से हुआ। टूर्नामेंट में दूसरी वरीयता प्राप्त सिंधु ने शुरुआत से ही मुकाबले पर अपनी पकड़ बनाए रखी।
भारतीय खिलाड़ी ने अपने सटीक शॉट्स, तेज रिटर्न और नेट पर बेहतरीन खेल के जरिए डेनिश प्रतिद्वंद्वी को लगातार दबाव में रखा। मुकाबले के दौरान सिंधु ने जिस तरह से कोर्ट के दोनों कोनों में शटल पहुंचाई, उससे केयर्सफेल्ट को अंक हासिल करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा।
पहले गेम में सिंधु ने 21-12 से जीत हासिल की, जबकि दूसरे गेम में भी उन्होंने अपनी लय बरकरार रखते हुए 21-14 से मुकाबला समाप्त कर दिया। इस तरह भारतीय खिलाड़ी ने बिना कोई गेम गंवाए हाइलो ओपन सुपर 500 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
इस सीजन का दूसरा बड़ा खिताब जीता
पीवी सिंधु के लिए यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि मौजूदा सीजन में यह उनका दूसरा खिताब है। इससे पहले जुलाई में उन्होंने जापान ओपन का खिताब जीतकर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय दिया था।
इसके बाद फ्रेंच ओपन में भी सिंधु ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था और फाइनल तक पहुंचने में सफलता हासिल की थी। हालांकि वहां उन्हें उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा था। फ्रेंच ओपन के बाद हाइलो ओपन में खिताबी जीत ने उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है।
500,000 अमेरिकी डॉलर की कुल इनामी राशि वाले इस टूर्नामेंट में सिंधु ने अपने अनुभव और खेल कौशल का शानदार इस्तेमाल किया। लगातार बड़े टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन करना उनके अंतरराष्ट्रीय करियर के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सटीक शॉट्स और नेट प्ले से विरोधी को किया परेशान
फाइनल मुकाबले की शुरुआत से ही सिंधु ने आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने पहला अंक क्रॉस-कोर्ट विनर लगाकर हासिल किया। हालांकि शुरुआत में कुछ गलतियों के कारण डेनमार्क की खिलाड़ी मुकाबले में वापसी करने में सफल रही और स्कोर 3-3 से बराबर हो गया।
इसके बाद सिंधु ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए रैलियों पर नियंत्रण बनाना शुरू किया। नेट के पास उनके शानदार खेल और सटीक शॉट्स ने केयर्सफेल्ट की मुश्किलें बढ़ा दीं। भारतीय खिलाड़ी ने जल्द ही 8-5 की बढ़त बना ली।
सिंधु ने पहले गेम में अपनी बढ़त को लगातार बनाए रखा। उनके आक्रामक स्ट्रोक्स और कोर्ट पर बेहतर मूवमेंट के सामने डेनिश खिलाड़ी को अंक जुटाने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी।
पहले गेम के अंतिम चरण में सिंधु ने एक शानदार बैकहैंड विनर लगाया और स्कोर 17-12 तक पहुंचा दिया। इसके बाद उन्होंने बिना ज्यादा मौका दिए गेम प्वाइंट हासिल किया और 21-12 से पहला गेम अपने नाम कर लिया।
दूसरे गेम में भी बरकरार रही भारतीय खिलाड़ी की लय
पहले गेम में जीत हासिल करने के बाद सिंधु ने दूसरे गेम में भी अपनी आक्रामकता कम नहीं होने दी। उन्होंने शुरुआत में ही 6-3 की बढ़त बना ली। केयर्सफेल्ट ने कुछ अच्छे शॉट्स लगाकर मुकाबले में वापसी करने की कोशिश की, लेकिन सिंधु ने जल्द ही अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
भारतीय खिलाड़ी ने लगातार विनर्स लगाते हुए स्कोर 10-6 कर दिया। इसके बाद डेनिश खिलाड़ी को नेट पर खेलने में काफी परेशानी हुई। सिंधु ने इस कमजोरी का फायदा उठाया और रैलियों को अपने पक्ष में मोड़ती रहीं।
दूसरे गेम में भारतीय खिलाड़ी ने 17-11 की मजबूत बढ़त हासिल कर ली। अब मुकाबला पूरी तरह उनके नियंत्रण में दिखाई दे रहा था। सिंधु ने आक्रामक रिटर्न के जरिए छह चैंपियनशिप प्वाइंट हासिल किए।
आखिरकार केयर्सफेल्ट की नेट पर हुई एक और गलती के साथ मुकाबला समाप्त हो गया। सिंधु ने अपने पहले ही मौके पर खिताब जीत लिया और भारतीय प्रशंसकों को जश्न मनाने का अवसर दिया।
केयर्सफेल्ट के खिलाफ सिंधु का शानदार रिकॉर्ड
फाइनल मुकाबले से पहले भी पीवी सिंधु का डेनमार्क की लाइन होजमार्क केयर्सफेल्ट के खिलाफ रिकॉर्ड काफी मजबूत था। दोनों खिलाड़ियों के बीच हुए पिछले मुकाबलों में सिंधु ने 6-1 की बढ़त बना रखी थी।
केयर्सफेल्ट को भारतीय खिलाड़ी के खिलाफ अपनी एकमात्र जीत 2015 के सुदीरमन कप फाइनल्स में मिली थी। हाइलो ओपन के फाइनल में जीत हासिल करके सिंधु ने इस रिकॉर्ड को और बेहतर कर लिया।
बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स की उम्मीदें हुई मजबूत
हाइलो ओपन में खिताबी जीत का फायदा पीवी सिंधु को रैंकिंग के लिहाज से भी मिलेगा। इस सफलता के साथ उन्हें 9,200 रैंकिंग अंक मिले हैं। इससे सीजन के अंत में आयोजित होने वाले बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालीफाई करने की उनकी दावेदारी मजबूत हुई है।
वर्ल्ड टूर फाइनल्स में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों को पूरे सीजन के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन करना होता है। ऐसे में जापान ओपन और हाइलो ओपन जैसे टूर्नामेंटों में मिली सफलता सिंधु के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ी उपलब्धि
पीवी सिंधु की यह जीत एक बार फिर साबित करती है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में उनका अनुभव और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण है। लगातार अच्छे खेल के दम पर उन्होंने अपने प्रशंसकों को एक और खिताबी जीत का तोहफा दिया है।
जापान ओपन के बाद हाइलो ओपन का खिताब जीतना उनके मौजूदा सीजन की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। अब भारतीय बैडमिंटन प्रशंसकों की नजरें उनके अगले मुकाबलों और बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स की संभावनाओं पर रहेंगी।
