इंडिया गठबंधन की रैली से पहले किरेन रिजिजू का कांग्रेस को खुला चैलेंज, पूछे 5 सवाल; चुनाव आयोग पर सियासी घमासान

दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की महारैली से पहले देश की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जा रही है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए पांच सवाल पूछे हैं। उन्होंने कांग्रेस को इन सवालों का जवाब देने की चुनौती भी दी है। रिजिजू के इस बयान से राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
विपक्ष की प्रस्तावित रैली में चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया जा रहा है। किरेन रिजिजू ने इसी राजनीतिक टकराव के बीच कांग्रेस से उसके चुनावी प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े सवालों का जवाब मांगा है।
रैली से पहले किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर हमला
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर कांग्रेस को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को पहले कुछ बुनियादी सवालों के जवाब देने चाहिए। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने पुराने चुनावी नतीजों और अपने शासनकाल के दौरान लिए गए फैसलों पर भी जवाब देना चाहिए।
रिजिजू ने अपने पोस्ट में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, मतदाता सूची की शुद्धता और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने इन मुद्दों को लेकर पार्टी से पांच सवाल पूछे। उनके इस बयान को विपक्ष की रैली से पहले राजनीतिक जवाबी हमले के रूप में देखा जा रहा है।
पहला सवाल: 2014 में कांग्रेस को केवल 44 सीटें कैसे मिलीं?
किरेन रिजिजू ने कांग्रेस से पहला सवाल 2014 के लोकसभा चुनाव को लेकर पूछा। उन्होंने कहा कि उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति भी उसी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। ऐसे में कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में केवल 44 सीटें कैसे मिलीं?
इस सवाल के जरिए रिजिजू ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन को लेकर पार्टी की जवाबदेही पर निशाना साधा। उनका तर्क है कि यदि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया जा रहा है, तो कांग्रेस को अपने पिछले चुनावी नतीजों के संदर्भ में भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यह सवाल ऐसे समय उठाया गया है, जब विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल खड़े कर रहा है।
दूसरा सवाल: 2024 में हार के लिए चुनाव आयोग जिम्मेदार कैसे?
रिजिजू का दूसरा सवाल 2024 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। उन्होंने पूछा कि जब ज्ञानेश कुमार उस समय मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे, तब कांग्रेस को लगातार तीसरी बार चुनावी हार का सामना कैसे करना पड़ा?
इस सवाल के माध्यम से केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच संबंध को लेकर सवाल उठाया। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि अलग-अलग चुनावों में उसके प्रदर्शन के पीछे क्या कारण रहे।
तीसरा सवाल: क्या कांग्रेस के मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे?
केंद्रीय मंत्री ने तीसरे सवाल में कांग्रेस की राजनीतिक जवाबदेही को मुद्दा बनाया। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस के मौजूदा मुख्यमंत्री इस्तीफा देंगे और 2014 से 2026 के बीच सरकारें बनाने के लिए माफी मांगेंगे?
रिजिजू का यह सवाल कांग्रेस की सरकारों और चुनावी राजनीति को लेकर उनकी टिप्पणी का हिस्सा है। उन्होंने अपने पोस्ट में कांग्रेस के सत्ता में आने और सरकारें बनाने के संदर्भ को उठाते हुए पार्टी से जवाब मांगा। हालांकि, इस सवाल के जरिए उन्होंने राजनीतिक तंज भी कसा है।
चौथा सवाल: मतदाता सूची से गलत नाम हटाने पर कांग्रेस का रुख क्या है?
रिजिजू ने चौथे सवाल में मतदाता सूची की शुद्धता का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या मतदाता सूची में मौजूद ऐसे सभी नाम हटा दिए जाने चाहिए, जो अवैध प्रवासियों, मृत व्यक्तियों, दूसरे स्थानों पर जा चुके लोगों या डुप्लिकेट प्रविष्टियों से जुड़े हैं?
यह सवाल मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर चल रही बहस से जुड़ा है। चुनावी प्रक्रिया में सही मतदाता सूची को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर मतदान कराया जाता है। एक ओर मतदाता सूची से गलत नाम हटाने की जरूरत पर जोर दिया जाता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष की ओर से यह चिंता जताई जाती है कि पुनरीक्षण के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से नहीं हटना चाहिए।
इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना बहस का अहम हिस्सा बन गया है।
पांचवां सवाल: क्या पुराने SIR भी अवैध थे?
किरेन रिजिजू का पांचवां सवाल विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की पुरानी प्रक्रियाओं को लेकर है। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि क्या 1952-56, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993, 1995 और 2002-2004 के दौरान किए गए विशेष पुनरीक्षण भी अवैध थे?
इस सवाल के जरिए रिजिजू ने यह बताने की कोशिश की कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण कोई नई प्रक्रिया नहीं है और पहले भी अलग-अलग समय पर ऐसे अभियान चलाए गए हैं। उनका सवाल है कि यदि मौजूदा SIR को लेकर आपत्ति जताई जा रही है, तो कांग्रेस को पुराने पुनरीक्षण अभियानों पर भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
संविधान और लोकतंत्र को लेकर भी साधा निशाना
अपने पोस्ट के आखिर में किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक परिवार के नेतृत्व वाली पार्टी बाहरी ताकतों के साथ मिलकर संविधान और भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। यह टिप्पणी विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज करती है।
दूसरी ओर, इंडिया गठबंधन की महारैली में चुनाव आयोग की भूमिका और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुख मुद्दों में शामिल रहने की संभावना है। विपक्षी दल इस मंच के जरिए चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अपने आरोपों को उठाना चाहते हैं।
रामलीला मैदान की रैली पर टिकी राजनीतिक नजरें
1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली रैली को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। वहीं, किरेन रिजिजू के पांच सवालों ने रैली से पहले कांग्रेस के सामने जवाब देने की राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस केंद्रीय मंत्री के सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और रामलीला मैदान की महारैली में विपक्ष चुनाव आयोग के मुद्दे को किस तरह उठाता है। फिलहाल, चुनाव आयोग, मतदाता सूची और SIR को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
