राहुल गांधी की दिल्ली महारैली से व्यापारियों को बड़ा नुकसान, 25 बाजारों में कारोबार ठप होने का दावा

दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस और विपक्षी दलों की महारैली अब राजनीतिक गतिविधियों के साथ-साथ व्यापारिक नुकसान को लेकर भी चर्चा में है। राहुल गांधी के नेतृत्व में हुई इस रैली के कारण राजधानी के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार प्रभावित होने का दावा किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले आयोजित इस कार्यक्रम ने उनके कारोबार को भारी नुकसान पहुंचाया। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार, रैली और उससे जुड़ी यातायात व्यवस्थाओं के कारण दिल्ली की करीब ढाई लाख दुकानें प्रभावित हुईं और कारोबारियों को लगभग 10 से 12 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ा।
त्योहारी सीजन में बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही सबसे अधिक महत्वपूर्ण होती है। ऐसे समय में सड़कों पर जाम, रास्तों में बदलाव और भीड़ के कारण ग्राहकों का बाजारों तक नहीं पहुंच पाना व्यापारियों के लिए बड़ी परेशानी बन गया। कारोबारियों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही रैली के आयोजन को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर की थीं, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।
रैली के कारण सेंट्रल दिल्ली में यातायात प्रभावित
रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण सेंट्रल दिल्ली के कई इलाकों में यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। रैली के आसपास की सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लगीं और कई स्थानों पर लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ा। इसका सीधा असर आसपास के व्यापारिक क्षेत्रों पर पड़ा।
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रैली के चलते रामलीला मैदान के आसपास स्थित करीब 25 बाजारों में कारोबार लगभग ठप रहा। उनका दावा है कि प्रमुख बाजारों में लगभग 80 प्रतिशत दुकानें बंद रहीं। जिन दुकानों को खुला रखा गया, वहां भी ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले काफी कम रही। व्यापारियों का कहना है कि जब ग्राहक बाजार तक पहुंच ही नहीं पाए, तो दुकानों के खुले रहने के बावजूद बिक्री प्रभावित होना स्वाभाविक था।
दिल्ली के इन 25 बाजारों में व्यापार पर पड़ा असर
रैली के कारण जिन बाजारों में कारोबार प्रभावित होने का दावा किया गया है, उनमें दिल्ली के कई बड़े और व्यस्त व्यापारिक केंद्र शामिल हैं। कश्मीरी गेट, चांदनी चौक, भागीरथ पैलेस, लाजपत मार्केट, करोल बाग, सदर बाजार, मीना बाजार, चावड़ी बाजार, पहाड़गंज और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख इलाकों का नाम सामने आया है।
इन बाजारों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाइयों, किराना, सजावटी सामान, ड्राई फ्रूट्स और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े उत्पादों का बड़ा कारोबार होता है। दीपावली के आसपास इन वस्तुओं की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में दुकानों का बंद रहना या ग्राहकों की आवाजाही कम होना कारोबारियों के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में बिक्री के लिए हर दिन महत्वपूर्ण होता है। ग्राहक खरीदारी के लिए पहले से योजना बनाते हैं और कई बार एक ही दिन में अलग-अलग बाजारों का चक्कर लगाते हैं। लेकिन रैली के दौरान यातायात बाधित होने और भीड़ के कारण लोगों ने बाजार आने से परहेज किया।
10 से 12 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का दावा
CTI ने रैली के कारण दिल्ली के व्यापार को करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान जताया है। संगठन का दावा है कि करीब ढाई लाख दुकानें किसी न किसी रूप में प्रभावित हुईं। हालांकि, यह आंकड़ा व्यापारिक संगठनों की ओर से लगाया गया अनुमान है।
किराना कमिटी दिल्ली और नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल जैसे अन्य व्यापारी संगठनों ने भी रैली के कारण कारोबार पर पड़े असर को लेकर चिंता जताई है। इन संगठनों का कहना है कि त्योहारों के ठीक पहले बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां तेज होती हैं। ऐसे समय में परिवहन और ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने से दुकानदारों, थोक व्यापारियों और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
राहुल गांधी को चार बार पत्र लिखकर जताई थी आपत्ति
व्यापारियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यह भी है कि उन्होंने रैली से पहले कई बार कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। CTI के अनुसार, संगठन ने रैली की तारीख और स्थान को लेकर कुल चार बार पत्र भेजे थे। व्यापारियों ने मांग की थी कि दीपावली के आसपास होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए रैली को आगे बढ़ाया जाए या इसके लिए किसी दूसरे स्थान का चयन किया जाए।
CTI ने पहली चिट्ठी 24 अक्टूबर 2026 को लिखी थी। इसमें त्योहारी सीजन को देखते हुए रैली स्थगित करने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद 27 अक्टूबर को दूसरी और 28 अक्टूबर को तीसरी चिट्ठी भेजी गई। इन पत्रों के माध्यम से व्यापारियों ने राहुल गांधी से मुलाकात के लिए 20 मिनट का समय मांगा था। उनका कहना था कि वे आमने-सामने बैठकर यह समझाना चाहते हैं कि रैली के आयोजन से बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर किस तरह का असर पड़ सकता है।
रैली के दिन भी भेजा गया था चौथा पत्र
व्यापारियों के मुताबिक, उनकी ओर से चौथा पत्र 1 नवंबर 2026 को रैली के दिन भेजा गया था। इसमें बाजारों के बंद रहने, यातायात बाधित होने और ग्राहकों की आवाजाही कम होने जैसी आशंकाओं को दोहराया गया। कारोबारियों का कहना है कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाता तो रैली के आयोजन की जगह या व्यवस्था में बदलाव किया जा सकता था।
त्योहार से पहले नुकसान को लेकर व्यापारियों में नाराजगी
रैली के बाद दिल्ली के व्यापारिक संगठनों में नाराजगी देखने को मिल रही है। व्यापारियों का कहना है कि दीपावली का समय उनके लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी अवसरों में से एक होता है। इस दौरान होने वाली बिक्री से न केवल दुकानदारों की कमाई होती है, बल्कि थोक कारोबारियों, कर्मचारियों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे सप्लायरों को भी रोजगार मिलता है।
कारोबारियों की मांग है कि राजनीतिक दलों को बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों की तारीख और स्थान तय करते समय स्थानीय व्यापार और आम लोगों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक रैलियां और विरोध प्रदर्शन महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके आयोजन के दौरान व्यापारिक क्षेत्रों में सामान्य गतिविधियां बाधित न हों, इसके लिए बेहतर योजना बनाना भी जरूरी है।
फिलहाल, राहुल गांधी की इस महारैली को लेकर राजनीतिक चर्चा के साथ दिल्ली के व्यापारिक नुकसान का मुद्दा भी गरमा गया है। व्यापारियों की ओर से लगाए गए 12 हजार करोड़ रुपये के नुकसान के अनुमान ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है कि बड़े राजनीतिक आयोजनों और शहर की आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
