चीन के शेयर बाजार में भारी गिरावट से मचा हड़कंप एक साल के निचले स्तर पर, AI शेयरों में बिकवाली से निवेशकों की बढ़ी चिंता

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चीन के शेयर बाजार में जारी गिरावट ने सरकार और वित्तीय नियामकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार को संभालने और निवेशकों का भरोसा वापस लाने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन इनका असर फिलहाल उम्मीद के मुताबिक दिखाई नहीं दे रहा है। मंगलवार को भी चीन के प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक कमजोरी के साथ कारोबार करते रहे और करीब एक साल के निचले स्तर पर बने रहे। खासतौर पर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार का माहौल खराब कर दिया है।

निवेशकों के बीच सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकार की ओर से शेयर खरीदने के लिए वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन देने की रणनीति इस बार बाजार में भरोसा पैदा करने में सफल नहीं हो रही है। लगातार गिरते शेयरों के कारण निवेशक नए सिरे से पैसा लगाने से बच रहे हैं। इससे चीन के वित्तीय बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

CSI300 इंडेक्स में लगातार गिरावट से बढ़ी परेशानी

चीन के शेयर बाजार की कमजोरी का अंदाजा ब्लू-चिप CSI300 इंडेक्स के प्रदर्शन से लगाया जा सकता है। यह सूचकांक देश की प्रमुख और बड़ी कंपनियों के शेयरों की स्थिति को दर्शाता है। इस साल जनवरी से अब तक इसमें करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।

अक्टूबर का महीना भी चीनी शेयर बाजार के लिए बेहद खराब रहा। इस दौरान CSI300 ने पिछले करीब एक दशक की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज की। इसके पीछे मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में हुई भारी बिकवाली को जिम्मेदार माना जा रहा है।

मंगलवार को भी इस इंडेक्स में राहत के संकेत नहीं मिले और यह 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। लगातार कमजोर प्रदर्शन ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में गिरावट का असर केवल कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव चीन के व्यापक इक्विटी बाजार पर दिखाई दे रहा है।

AI और टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

चीन के शेयर बाजार में सबसे ज्यादा दबाव टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों पर देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ समय से AI सेक्टर को भविष्य की सबसे बड़ी निवेश संभावनाओं में गिना जा रहा था। इसी उम्मीद में निवेशकों ने इस क्षेत्र की कंपनियों में बड़े पैमाने पर पैसा लगाया था।

हालांकि, अब इन शेयरों में तेजी से बिकवाली देखने को मिल रही है। मंगलवार को टेक्नोलॉजी कंपनियों से जुड़े STAR Chip Index में कारोबार के दौरान करीब 7 प्रतिशत तक गिरावट आ गई। यह दिसंबर 2025 के बाद इसका सबसे निचला स्तर रहा। इसी तरह AI इंडेक्स में भी 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।

टेक्नोलॉजी शेयरों में लगातार गिरावट से यह सवाल उठने लगा है कि क्या निवेशकों का AI सेक्टर की विकास संभावनाओं पर भरोसा कमजोर पड़ रहा है। चीन सरकार चाहती है कि उसका शेयर बाजार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के लिए निवेश और पूंजी जुटाने का प्रमुख माध्यम बने, लेकिन मौजूदा हालात इस योजना के सामने चुनौती खड़ी कर रहे हैं।

सरकारी प्रयासों के बावजूद निवेशक बाजार से बना रहे दूरी

चीन की सरकार और वित्तीय नियामकों ने बाजार को स्थिर करने के लिए नए कदम उठाए हैं। सोमवार को नियामकों ने ब्रोकरों, निवेश फंड और कंपनियों के माध्यम से शेयर खरीद के लिए वित्तपोषण बढ़ाने से जुड़े उपायों की घोषणा की थी।

सरकार की कोशिश है कि बाजार में अतिरिक्त नकदी पहुंचे और संस्थागत निवेशक शेयर खरीदने के लिए आगे आएं। इससे शेयरों की कीमतों को सहारा मिलने और बाजार में गिरावट रुकने की उम्मीद है।

हालांकि, निवेशकों के बीच भरोसे की कमी इन प्रयासों की राह में बड़ी बाधा बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जब निवेशकों को भविष्य में शेयरों की कीमतों में सुधार की उम्मीद नहीं होती, तब केवल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने से वे जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं होते।

बड़े शेयरधारकों के सामने भी यही समस्या है। गिरते बाजार में उधार लेकर शेयर खरीदने का जोखिम काफी बढ़ जाता है। यदि कीमतों में और गिरावट आती है तो नुकसान का बोझ निवेशकों को ही उठाना पड़ता है। इसलिए फिलहाल कई निवेशक नई खरीदारी से बच रहे हैं।

शंघाई कंपोजिट इंडेक्स भी करीब एक साल के निचले स्तर पर

चीन के शेयर बाजार में कमजोरी का असर दूसरे प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखाई दिया। मंगलवार को शंघाई कंपोजिट इंडेक्स में 0.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही यह सूचकांक भी करीब एक साल के निचले स्तर के आसपास बना रहा।

इस गिरावट से संकेत मिलता है कि चीन के बाजार में दबाव केवल AI और चिप कंपनियों तक सीमित नहीं है। निवेशकों की सतर्कता का असर व्यापक बाजार पर पड़ रहा है।

बाजार में लगातार बिकवाली होने से कंपनियों के बाजार मूल्य पर भी दबाव बढ़ता है। इसका असर भविष्य में कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने की क्षमता पर पड़ सकता है। यही वजह है कि चीन के नीति निर्माता शेयर बाजार में स्थिरता लाने को लेकर गंभीर नजर आ रहे हैं।

सितंबर 2024 के राहत पैकेज से इस बार क्यों अलग हैं हालात?

चीन ने सितंबर 2024 में भी शेयर बाजार को संभालने के लिए बड़े आर्थिक प्रोत्साहन उपायों की घोषणा की थी। उस समय ब्याज दरों में कटौती और नकद आरक्षित अनुपात यानी CRR में कमी जैसे कदम उठाए गए थे। इन उपायों के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल बना और करीब दो साल तक तेजी का दौर देखने को मिला।

लेकिन इस बार परिस्थितियां कुछ अलग दिखाई दे रही हैं। मौजूदा समय में नियामकों की ओर से घोषित उपाय मुख्य रूप से पहले से उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं में बदलाव और शेयर खरीद के लिए वित्तपोषण बढ़ाने पर केंद्रित हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि इस बार 2024 जैसा बड़ा राहत पैकेज मिलने की संभावना फिलहाल कम है। हालांकि, यदि बाजार में गिरावट जारी रहती है तो सरकार अतिरिक्त कदम उठाने पर विचार कर सकती है।

चीनी युआन की मजबूती रोकने के लिए PBOC का नया कदम

शेयर बाजार में गिरावट के बीच चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) ने मुद्रा बाजार को लेकर भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सोमवार को बैंक ने विदेशी मुद्रा आरक्षित आवश्यकता में बदलाव किया, ताकि युआन की लगातार बढ़ती मजबूती पर नियंत्रण लगाया जा सके।

इस फैसले से बाजार में डॉलर की खरीद को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। युआन 2025 की शुरुआत से अब तक करीब 10 प्रतिशत मजबूत हो चुका है। हालांकि, सोमवार को इसमें पांच महीने की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई।

मुद्रा बाजार में होने वाले बदलाव चीन की अर्थव्यवस्था और उसके निर्यात कारोबार के लिए महत्वपूर्ण हैं। युआन की मजबूती से चीनी उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत महंगे हो सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक मुद्रा बाजार में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

2024 जैसा बड़ा राहत पैकेज मिलने की उम्मीद कम

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, चीन के वित्तीय नियामकों के बीच हालिया कदम बाजार को स्थिर करने के लिए बेहतर समन्वय का संकेत देते हैं। हालांकि, मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए 2024 जैसे व्यापक प्रोत्साहन पैकेज की संभावना सीमित मानी जा रही है।

चीन की आर्थिक वृद्धि फिलहाल नीति निर्माताओं की स्वीकार्य सीमा में बताई जा रही है। साथ ही, हालिया शेयर बाजार की बिकवाली के पीछे अर्थव्यवस्था के बुनियादी हालात में किसी नई बड़ी गिरावट के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।

कुल मिलाकर चीन के शेयर बाजार के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों का खोता हुआ भरोसा है। सरकार और नियामक बाजार में नकदी बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन जब तक निवेशकों को स्थिरता और बेहतर रिटर्न की उम्मीद नहीं मिलती, तब तक तेजी की वापसी मुश्किल हो सकती है। आने वाले दिनों में CSI300, शंघाई कंपोजिट और AI शेयरों का प्रदर्शन यह तय करने में महत्वपूर्ण होगा कि चीन का शेयर बाजार मौजूदा दबाव से कब तक बाहर निकल पाता है।

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