शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 906 अंक उछला और निफ्टी 23,300 के पार, कच्चे तेल की गिरती कीमतों से निवेशकों को राहत

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भारतीय शेयर बाजार में हफ्ते की शुरुआत शानदार रही। सोमवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मिले-जुले लेकिन सकारात्मक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। अमेरिकी और ईरान के बीच बातचीत सफल होने की उम्मीदों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। इसका सीधा असर निवेशकों की धारणा पर दिखाई दिया और प्रमुख शेयर बाजार सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक तक की तेजी दर्ज की गई।

कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 900 अंकों से अधिक चढ़ गया, जबकि एनएसई निफ्टी ने भी 23,300 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर लिया। ऊर्जा, ऑटो और आईटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल बनाया।

सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूती के साथ की शुरुआत

सोमवार को कारोबारी सत्र की शुरुआत होते ही बाजार में खरीदारी का माहौल दिखाई दिया। बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,459.53 के मुकाबले 718.71 अंक यानी 0.96 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,178.24 पर खुला।

इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी मजबूती के साथ कारोबार शुरू करते हुए पिछले बंद स्तर 23,053.10 से 169.20 अंक यानी 0.73 प्रतिशत ऊपर 23,222.30 पर पहुंच गया।

शुरुआती कारोबार में निवेशकों की खरीदारी बढ़ने से दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेजी और मजबूत हुई। दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 906.53 अंकों यानी 1.21 प्रतिशत की छलांग लगाकर 75,366.06 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं निफ्टी 248.15 अंक यानी 1.07 प्रतिशत चढ़कर 23,301.25 के स्तर तक पहुंच गया।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी

बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों के शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई।

निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.83 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.63 प्रतिशत मजबूत हुआ।

बाजार के व्यापक सूचकांकों में तेजी यह संकेत देती है कि निवेशकों का रुझान अलग-अलग श्रेणियों के शेयरों की ओर भी बना हुआ है। बड़ी कंपनियों के साथ मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।

ऑयल एंड गैस सेक्टर में सबसे ज्यादा उछाल

सोमवार के कारोबार में सेक्टरवार प्रदर्शन देखें तो ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में सबसे ज्यादा मजबूती देखने को मिली। निफ्टी ऑयल एंड गैस इंडेक्स में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

इसके अलावा ऑटो और आईटी सेक्टर के शेयर भी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। निफ्टी ऑटो इंडेक्स में 0.77 प्रतिशत और निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.51 प्रतिशत की मजबूती रही।

हालांकि बाजार के सभी सेक्टरों में तेजी नहीं रही। रियल्टी और मीडिया क्षेत्र के शेयरों पर कुछ दबाव देखने को मिला। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.74 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी मीडिया में 0.06 प्रतिशत की मामूली कमजोरी दर्ज की गई।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को राहत

भारतीय शेयर बाजार में आई तेजी के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी को माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सकारात्मक प्रगति की उम्मीदों ने निवेशकों को राहत दी है।

पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग 118 डॉलर प्रति बैरल के ऊंचे स्तर तक पहुंच गई थीं। हालांकि इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और यह लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई।

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब तीन प्रतिशत गिरकर 109.97 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत भी लगभग तीन प्रतिशत टूटकर 100.81 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने से देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। यही वजह है कि कच्चे तेल में गिरावट को भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

बाजार में सकारात्मक माहौल बनने का एक अन्य कारण अमेरिका के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आई गिरावट भी रही। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड घटकर 4.93 प्रतिशत तक पहुंच गई।

बॉन्ड यील्ड में गिरावट को वैश्विक निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। इससे शेयर बाजारों में निवेश के आकर्षण और पूंजी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

हालांकि निवेशक केवल एक संकेत के आधार पर फैसला नहीं लेते। वैश्विक ब्याज दरों, महंगाई, कंपनियों के नतीजों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी उनकी नजर बनी रहती है।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत

भारतीय बाजार में तेजी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों की तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं रही। एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिली और कई प्रमुख सूचकांक दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए।

इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार भी गिरावट के साथ बंद हुआ था। तकनीकी कंपनियों इंटेल और अमेजन के उम्मीद से कमजोर नतीजों तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर बढ़ते निवेश को लेकर चिंताओं ने अमेरिकी बाजारों की धारणा प्रभावित की थी।

इन घटनाओं के चलते नैस्डैक में 5 जून के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की गई थी।

इसके बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने घरेलू कारकों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के दम पर सकारात्मक शुरुआत की। इससे पता चलता है कि वैश्विक दबाव के बीच भी घरेलू बाजार अपने आर्थिक संकेतों के आधार पर मजबूती दिखा सकता है।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर बनी रह सकती है।

यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जारी रहती है और वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होता है, तो भारतीय शेयर बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। हालांकि भू-राजनीतिक तनाव या वैश्विक बाजारों में अचानक गिरावट से घरेलू निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।

कुल मिलाकर सोमवार की तेजी ने भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बनाया है। सेंसेक्स का 75,000 के ऊपर पहुंचना और निफ्टी का 23,300 का स्तर पार करना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम रहा। हालांकि बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है, इसलिए निवेशकों के लिए सोच-समझकर निवेश संबंधी फैसले लेना जरूरी होगा।

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