भूजल संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल, ‘कैच द रेन’ अभियान से लाखों रिचार्ज और जल संचयन परियोजनाएं पूरी

देश में तेजी से घटते भूजल स्तर को सुधारने के लिए सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर काम किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में सितंबर 2024 में शुरू की गई ‘कैच द रेन–जल संचय जन भागीदारी’ पहल के तहत अब तक 39.6 लाख से अधिक कृत्रिम भूजल रिचार्ज और जल संग्रहण परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। गुरुवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम उपयोग कर भूजल स्तर को फिर से मजबूत करना है, ताकि भविष्य में पानी की कमी की चुनौती से निपटा जा सके।
सरकार के अनुसार पानी की कमी को रोकने के लिए देशभर में लगभग 1.42 करोड़ वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनके माध्यम से करीब 185 अरब घन मीटर भूजल को दोबारा भरने का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल के तहत वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्भरण, बोरवेल रिचार्ज और रिचार्ज शाफ्ट जैसी तकनीकों को अपनाया जा रहा है। भूजल कृत्रिम रिचार्ज मास्टर प्लान में अलग-अलग क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त रिचार्ज तकनीकों पर जोर दिया गया है।
भूजल भारत की जल सुरक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। खेती, पेयजल आपूर्ति और पर्यावरण का बड़ा हिस्सा इसी पर निर्भर है, लेकिन जरूरत से ज्यादा दोहन, पानी की गुणवत्ता में गिरावट और जलवायु परिवर्तन के चलते भूजल पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। इसी वजह से सरकार ने भूजल के टिकाऊ और वैज्ञानिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी है।
जल शक्ति मंत्रालय के नेतृत्व में देशभर में 43 हजार से अधिक भूजल निगरानी केंद्र, 712 जल शक्ति केंद्र और 53,264 अटल जल गुणवत्ता जांच केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही अटल भूजल योजना के जरिए गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे जल संकट वाले राज्यों में सामुदायिक स्तर पर भूजल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत अब तक 6.68 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में पानी के कुशल उपयोग को सुनिश्चित किया गया है।
25 दिसंबर 2019 से जल जीवन मिशन के तहत जल स्रोतों को टिकाऊ बनाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। पांच साल की इस योजना पर करीब 6,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें संस्थागत मजबूती और बेहतर परिणामों पर खास ध्यान दिया गया है। वहीं अप्रैल 2022 में शुरू हुई मिशन अमृत सरोवर योजना के तहत देश के हर जिले में तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। अब तक 68 हजार से अधिक तालाब पूरे हो चुके हैं, जिनसे जल संचय और भूजल रिचार्ज को मजबूती मिल रही है।
सरकार द्वारा तैयार भूजल मॉडल विधेयक को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है और अब तक 21 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों ने इसे अपना लिया है। इनमें बिहार, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। केंद्र सरकार लगातार बैठकों, सेमिनारों और सम्मेलनों के जरिए भूजल संरक्षण, सही उपयोग और सतत प्रबंधन को बढ़ावा दे रही है। बढ़ते जल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौती को देखते हुए सरकार ने भूजल प्रबंधन को टिकाऊ विकास के लिए बेहद अहम बताया है।
