उड़ानें रद्द और देरी करने पर डीजीसीए ने इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो पर 22 करोड़ 20 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में बड़े पैमाने पर उड़ानों के रद्द होने और देरी के मामलों को लेकर की गई है। 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द हुई थीं, जबकि 1,852 उड़ानों में देरी दर्ज की गई थी। इसके चलते देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर तीन लाख से अधिक यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा था।
डीजीसीए ने इंडिगो के परिचालन में आई इस गंभीर बाधा के कारणों की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया था। समिति की विस्तृत जांच और मूल्यांकन के बाद एयरलाइन पर यह जुर्माना लगाया गया। इसमें नागरिक उड्डयन नियमों के कई उल्लंघनों को लेकर एक करोड़ 80 लाख रुपये का एकमुश्त प्रणालीगत जुर्माना शामिल है। इसके अलावा पिछले वर्ष 5 दिसंबर से 10 फरवरी तक 68 दिनों के लिए प्रतिदिन 30 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिससे कुल राशि बढ़कर 20 करोड़ 40 लाख रुपये हो गई। अन्य दंडात्मक प्रावधानों को जोड़ते हुए कुल जुर्माना 22 करोड़ 20 लाख रुपये तक पहुंच गया।
जांच समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि उड़ानों में व्यवधान के पीछे मुख्य कारण परिचालन का अत्यधिक अनुकूलन, अपर्याप्त नियामक तैयारी और प्रबंधन व परिचालन नियंत्रण से जुड़ी गंभीर कमियां थीं। समिति ने पाया कि एयरलाइन प्रबंधन योजना संबंधी कमजोरियों की समय पर पहचान नहीं कर पाया और न ही पर्याप्त परिचालन बफर बनाए रखे गए। इसके साथ ही संशोधित उड़ान ड्यूटी समय सीमा से जुड़े प्रावधानों को भी प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि चालक दल, विमानों और नेटवर्क संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जरूरत से ज्यादा जोर देने के कारण रोस्टर बफर मार्जिन काफी कम हो गया। इसी का नतीजा यह रहा कि मामूली व्यवधान भी बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने और देरी का कारण बन गया, जिससे यात्रियों को व्यापक स्तर पर परेशानी झेलनी पड़ी।
