कच्चे तेल की कीमतों में एक प्रतिशत से ज्यादा गिरावट, अमेरिकी भंडार बढ़ने से बाजार पर दबाव
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आज एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। तेल की कीमतों पर दबाव उस समय बढ़ा जब अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई और भौतिक तेल बाजार में मांग की कमजोरी के संकेत मिले। इसके साथ ही निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी संभावित वार्ताओं पर भी टिकी रही, क्योंकि इन बातचीतों का असर मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत में लगभग 1.3 प्रतिशत की गिरावट देखी गई और यह करीब 69 डॉलर 90 सेंट प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी करीब 1.7 प्रतिशत टूटकर लगभग 64 डॉलर 33 सेंट प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका में कच्चे तेल के स्टॉक में तेज बढ़ोतरी है, जिसने आपूर्ति को लेकर चिंताओं को कम किया है और कीमतों पर दबाव डाला है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका में कच्चे तेल का भंडार 1.6 करोड़ बैरल बढ़कर 435.8 मिलियन बैरल तक पहुंच गया। यह वृद्धि पिछले तीन वर्षों में सबसे बड़ी मानी जा रही है। आमतौर पर जब भंडार में इतनी बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो यह संकेत मिलता है कि बाजार में आपूर्ति अपेक्षा से अधिक है या फिर मांग उतनी मजबूत नहीं है जितनी अनुमानित थी। ऐसे में निवेशक सतर्क रुख अपनाते हैं और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है।
इसके अलावा वैश्विक स्तर पर तेल की वास्तविक मांग को लेकर भी कुछ कमजोर संकेत मिल रहे हैं। कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बताई जा रही है, जिससे ईंधन की खपत पर असर पड़ सकता है। इसी बीच अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक वार्ताओं को लेकर भी बाजार में हलचल है। यदि इन वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं और किसी तरह का सैन्य टकराव टलता है, तो तेल आपूर्ति में बाधा की आशंकाएं कम हो सकती हैं, जो कीमतों को और नीचे ला सकती हैं।
हालांकि विश्लेषकों का यह भी मानना है कि तेल बाजार बेहद संवेदनशील है और भू-राजनीतिक घटनाओं, उत्पादन कटौती या अप्रत्याशित मांग वृद्धि जैसे कारकों के कारण इसमें तेजी से उतार-चढ़ाव आ सकता है। फिलहाल बढ़ते अमेरिकी भंडार और मांग से जुड़े संकेतों ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है, जिससे कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इन्वेंट्री डेटा, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और कूटनीतिक गतिविधियों पर बनी रहेगी।
