मजबूत डॉलर के दबाव में सोना-चांदी फिसले, निवेशकों की नजर फेड के अगले कदम पर

Untitled-5
Share this post

अमेरिकी महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद डॉलर मजबूत होने से सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार MCX पर गोल्ड अप्रैल फ्यूचर्स इंट्रा-डे कारोबार में सुबह करीब 12.30 बजे 0.56 फीसदी गिरकर 1,55,023 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं सिल्वर मार्च फ्यूचर्स 1.99 फीसदी टूटकर 2,39,501 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।

बाजार में यह दबाव अमेरिकी महंगाई के नरम संकेतों और डॉलर की मजबूती के कारण देखने को मिला। जनवरी में महंगाई दर में नरमी के बावजूद डॉलर इंडेक्स में बढ़त दर्ज की गई, जिससे अन्य करेंसी रखने वाले निवेशकों के लिए डॉलर में कीमत तय होने वाली कीमती धातुएं महंगी हो गईं।

महंगाई के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में 0.3 फीसदी बढ़ोतरी के बाद जनवरी में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 0.2 फीसदी बढ़ा। सालाना आधार पर महंगाई 2.4 फीसदी रही, जो पहले के 2.7 फीसदी से कम है। इन संकेतों से बाजार को उम्मीद है कि संयुक्त राज्य अमेरिका फेडरल रिजर्व के पास ब्याज दरों को लेकर नीति में बदलाव की गुंजाइश बन सकती है।

मार्केट एनालिस्ट्स के मुताबिक सोने को 1,54,000 और 1,53,150 रुपये पर मजबूत सपोर्ट मिल सकता है, जबकि 1,56,800 और 1,58,200 रुपये के स्तर पर रेजिस्टेंस है। वहीं चांदी के लिए 2,38,800 और 2,32,000 रुपये सपोर्ट जोन माने जा रहे हैं, जबकि 2,49,100 और 2,55,000 रुपये पर रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद कीमती धातुओं का लंबी अवधि का ट्रेंड अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। इसके पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीदारी और निवेशकों का बॉन्ड व करेंसी बाजार से निकलना प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX पर चांदी रिकॉर्ड स्तर से गिरने के बाद अब 73 से 84 डॉलर के दायरे में कारोबार कर रही है। हालांकि दीर्घकालिक तेजी का ढांचा बरकरार माना जा रहा है, लेकिन हालिया गिरावट ने कीमतों को प्रमुख मूविंग एवरेज से नीचे धकेल दिया है, जो अल्पकालिक दबाव और लंबी करेक्शन अवधि का संकेत देता है।

अब निवेशकों की नजर फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक के मिनट्स, अमेरिकी GDP के अग्रिम अनुमान और PCE महंगाई डेटा पर टिकी है, जिनसे ब्याज दरों की दिशा को लेकर नए संकेत मिल सकते हैं।

इसके अलावा बाजार प्रतिभागी संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की प्रगति तथा रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इनसे कच्चे तेल और वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *