श्री गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व पर खुरालगढ़ साहिब में राज्य स्तरीय समागम, समानता और भाईचारे की गूंज
श्री गुरु रविदास जी के पावन प्रकाश पर्व के शुभ अवसर पर चरण छोह प्राप्त पावन धरती श्री खुरालगढ़ साहिब में आयोजित राज्य स्तरीय समागम में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल पर पहुंचकर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के समक्ष माथा टेकने का अवसर मिला, जिसने मन को शांति और आत्मिक बल प्रदान किया। समागम के दौरान देश-प्रदेश से बड़ी संख्या में पहुंचे संत-महापुरुषों के विचार सुनने और विशाल संगत के दर्शन-दीदार करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ।
इस पावन अवसर पर गुरु साहिब जी के चरणों में पंजाब में सर्व-सांझीवालता, सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे की भावना सदा कायम रहने की प्रार्थना की गई। संगत की एकजुटता और श्रद्धा ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि गुरु रविदास जी के विचार आज भी समाज को जोड़ने की मजबूत कड़ी बने हुए हैं। खुरालगढ़ साहिब की पवित्र धरती पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब इस बात का प्रमाण है कि गुरु साहिब का संदेश समय और सीमाओं से परे है।
इसी अवसर पर श्री गुरु रविदास जी के प्रकाश पर्व को समर्पित राज्य स्तरीय समागमों की श्रृंखला की भी औपचारिक शुरुआत की गई। यह पहल गुरु साहिब के विचारों और उनके सामाजिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में आयोजित होने वाले इन समागमों के माध्यम से समानता, भाईचारा और मानवता के मूल्यों को और अधिक मजबूती देने का संकल्प लिया गया।
श्री गुरु रविदास जी का संपूर्ण जीवन समाज में बराबरी और आपसी प्रेम का प्रतीक रहा है। उन्होंने अपने उपदेशों के माध्यम से यह सिखाया कि इंसान की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि उसकी जाति या जन्म से। यही कारण है कि आज भी उनके विचार समाज के हर वर्ग को प्रेरित करते हैं। समागम के दौरान वक्ताओं ने गुरु साहिब के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में उनके संदेश की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
इस राज्य स्तरीय समागम ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता का भी संदेश दिया। यह हमारा सामूहिक कर्तव्य है कि श्री गुरु रविदास जी के उपदेशों को केवल आयोजनों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और समाजिक जीवन में उतारें और दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाएं। यही गुरु साहिब के प्रति सच्ची श्रद्धा और प्रकाश पर्व का वास्तविक अर्थ है।
