ऋषिकेश में गंगा सफाई की अनूठी मिसाल, 5 दोस्तों से शुरू हुआ हिमाद्रि फाउंडेशन बना 400 युवाओं की ताकत

J
Share this post

ऋषिकेश के घाटों पर अक्सर लोग शराब की खाली बोतलें और प्लास्टिक कचरा छोड़कर चले जाते हैं, जिससे गंगा की पवित्रता और शहर की सुंदरता पर सवाल खड़े हो जाते हैं। लेकिन इसी ऋषिकेश में कुछ ऐसे युवा भी हैं, जो बिना किसी सरकारी मदद के मां गंगा की सेवा में दिन-रात जुटे हुए हैं। सिर्फ पांच दोस्तों से शुरू हुआ हिमाद्रि फाउंडेशन आज 400 से अधिक युवाओं की एक मजबूत टीम बन चुका है, जो इस साल अकेले 50 से ज्यादा सफाई अभियान चलाकर ऋषिकेश की तस्वीर बदलने में जुटी है।

देवभूमि ऋषिकेश को पूरी दुनिया योग, पर्यटन और शांति के केंद्र के रूप में जानती है, लेकिन इस पहचान के पीछे बढ़ता प्रदूषण एक कड़वी सच्चाई बन चुका है। घाटों पर फैला प्लास्टिक, गंदगी और शराब की बोतलें शहर की सबसे बड़ी चुनौती हैं। जब नगर पालिका और प्रशासन के प्रयास नाकाफी साबित होने लगे, तब हिमाद्रि फाउंडेशन ने आगे बढ़कर इस जिम्मेदारी को अपने कंधों पर लिया। सतत विकास को अपना मूल मंत्र मानने वाला यह संगठन बिना किसी आर्थिक सहायता के गंगा किनारे से टनों कचरा हटाकर न सिर्फ सफाई कर रहा है, बल्कि लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी कर रहा है।

फाउंडेशन की सेक्रेटरी शगुन बताती हैं कि करीब चार से पांच साल पहले कुछ युवाओं ने ऋषिकेश की प्राकृतिक सुंदरता और गंगा की पवित्रता को बचाने के उद्देश्य से इस पहल की शुरुआत की थी। शुरुआत में टीम में केवल चार-पांच लोग थे, जो छोटे स्तर पर सफाई करते थे। लेकिन उनके समर्पण और मेहनत को देखकर धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए और आज यह मुहिम 400 से ज्यादा स्वयंसेवकों का कारवां बन चुकी है।

इस साल हिमाद्रि फाउंडेशन की गतिविधियां और तेज हो गई हैं। टीम हर हफ्ते अलग-अलग घाटों पर पहुंचकर प्लास्टिक, कांच और अन्य कचरा हटाती है। उनका मकसद सिर्फ सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों की सोच बदलना भी है। फाउंडेशन का मानना है कि जब तक लोग खुद गंदगी फैलाने की आदत नहीं छोड़ेंगे, तब तक किसी भी अभियान की सफलता अधूरी रहेगी। इसी सोच के साथ हिमाद्रि फाउंडेशन ऋषिकेश को स्वच्छ और गंगा को निर्मल बनाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *