लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया नमन, बताया सुशासन और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा

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कबीरधाम जिले के ग्राम राम्हेपुर में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती श्रद्धा, सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि, ग्रामीणजन और विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन, उनके आदर्शों और समाज के लिए किए गए ऐतिहासिक योगदानों को याद करना तथा नई पीढ़ी को उनके व्यक्तित्व से प्रेरित करना था।

समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके लोककल्याणकारी कार्यों को स्मरण किया। कार्यक्रम में उनके जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और बताया गया कि किस प्रकार उन्होंने अपने शासनकाल में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समाज के सभी वर्गों के विकास के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। उनका व्यक्तित्व भारतीय इतिहास में एक ऐसे आदर्श शासक के रूप में स्थापित है, जिन्होंने प्रशासन, न्याय और जनसेवा के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर केवल एक शासक नहीं थीं, बल्कि वे सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों की जीवंत मिसाल थीं। उन्होंने अपने जीवनकाल में ऐसे अनेक कार्य किए, जिनका लाभ समाज को आज भी मिल रहा है। उनके शासनकाल को न्यायप्रियता, सुशासन और जनकल्याण के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है। उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास और सुविधाओं का लाभ पहुंचे।

उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होलकर ने भारतीय संस्कृति और धार्मिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं और सार्वजनिक उपयोग की संरचनाओं का निर्माण कर उन्होंने समाज को एक स्थायी धरोहर प्रदान की। उनके प्रयासों ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को भी सशक्त किया। आज भी उनके द्वारा करवाए गए कई निर्माण कार्य भारतीय इतिहास और संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान बने हुए हैं।

विजय शर्मा ने कहा कि लोकमाता का जीवन विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अद्भुत साहस, धैर्य और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया। उस समय जब महिलाओं की भूमिका सीमित मानी जाती थी, तब उन्होंने अपने निर्णयों और कार्यों से यह सिद्ध किया कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व कर सकती हैं। यही कारण है कि उन्हें महिला सशक्तिकरण की अग्रदूतों में गिना जाता है।

उन्होंने कहा कि लोकमाता अहिल्याबाई होलकर ने समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की नीति अपनाई और समानता, न्याय तथा सामाजिक समरसता को अपने शासन का आधार बनाया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे। वर्तमान समय में भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

समारोह में उपस्थित लोगों ने लोकमाता के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उनके जीवन पर आधारित विचारों का आदान-प्रदान किया गया और युवाओं को उनके संघर्ष, सेवा भावना तथा नेतृत्व क्षमता के बारे में जानकारी दी गई। आयोजन ने न केवल ऐतिहासिक विरासत को याद करने का अवसर प्रदान किया, बल्कि समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का भी कार्य किया।

लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 301वीं जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम उनके महान व्यक्तित्व, जनसेवा और राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को सम्मानपूर्वक स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर बन गया। उनके आदर्श आज भी समाज को प्रेरित कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बने हुए हैं।

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