भारत–ईयू ट्रेड डील पर उद्योग जगत की मुहर, बिजनेस लीडर्स बोले– ऐतिहासिक समझौता

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भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुई ट्रेड डील को उद्योग जगत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया है। बिजनेस लीडर्स का कहना है कि इस समझौते से एक विशाल संयुक्त बाजार तैयार होगा, जिससे भारत और यूरोप—दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को लंबे समय तक लाभ मिलेगा। उनका मानना है कि यह डील मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच व्यापार के लिए नई दिशा तय करेगी।

इंडो–ईयू बिजनेस फोरम के साइडलाइन पर बातचीत के दौरान हैफेले इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर फ्रैंक श्लोडर ने कहा कि भारत और ईयू के बीच लंबे समय तक चली बातचीत के बाद इस ट्रेड डील का पूरा होना अपने आप में ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि ऐसे दौर में, जब नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था में उथल-पुथल देखी जा रही है, यह समझौता व्यापार जगत के लिए भरोसे और स्थिरता का संदेश देता है।

आर्टसाना इंडिया–चिक्को के सीईओ राजोश वोहरा ने इस समझौते को बेहद सकारात्मक बताते हुए कहा कि एक इटालियन कंपनी होने के नाते वे इसे आयात और निर्यात प्रक्रियाओं को सरल बनाने वाला कदम मानते हैं। उनके अनुसार, इससे व्यापार करना आसान होगा और दोनों क्षेत्रों में व्यवसायों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

डेकी इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के एमडी विनोद शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी पिछले चार दशकों से भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेड डील दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग को और मजबूत करेगी। भारत के लिए यूरोप न सिर्फ एक बड़ा बाजार है, बल्कि वहां से उन्नत तकनीक और निवेश के नए अवसर भी सामने आएंगे।

एल्सेवियर के चेयरमैन वाईएस ची ने कहा कि यह समझौता व्यापार के लिहाज से बेहद उपयोगी साबित होगा। इससे ट्रेड, टैलेंट और बौद्धिक संपदा के क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। उनके मुताबिक, इसका सकारात्मक असर केवल भारत और यूरोप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी इससे फायदा होगा।

बिजनेस यूरोप के प्रेसिडेंट फ्रेडरिक पर्सन ने कहा कि भारत–ईयू ट्रेड डील ऐसे समय में हुई है, जब इसकी सबसे अधिक जरूरत थी। उन्होंने कहा कि दोनों क्षेत्र मिलकर दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह समझौता भारत की कुशल मानव संसाधन क्षमता और यूरोप की उन्नत टेक्नोलॉजी को एक साथ लाने में मदद करेगा, जिससे नियम-आधारित व्यवस्था के तहत दोनों पक्षों को समान रूप से लाभ मिलेगा।

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