भारत की अदालतों में बढ़ेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग, कई पायलट प्रोजेक्ट्स से बदलेगा न्यायिक तंत्र
केंद्र सरकार ने गुरुवार को भारत की अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग की जानकारी साझा की और न्यायिक दक्षता बढ़ाने के लिए चल रहे कई पायलट प्रोजेक्ट्स का विवरण पेश किया। राज्यसभा में यह जानकारी कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने दी।
सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति के अनुसार, मशीन लर्निंग, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी उन्नत तकनीकें पहले से ही ई-कोर्ट्स सॉफ्टवेयर में इस्तेमाल हो रही हैं। ये तकनीकें अनुवाद, केस फोरकास्टिंग, ऑटो-फाइलिंग, इंटेलिजेंट शेड्यूलिंग और चैटबॉट के ज़रिए वादियों से संवाद में मदद करती हैं।
एनआईसी की AI डिवीजन और eCourts सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा ‘लीगल रिसर्च एनालिसिस असिस्टेंट’ (LegRAA) नामक AI टूल विकसित किया गया है। यह टूल न्यायाधीशों को कानूनी शोध, दस्तावेज़ विश्लेषण और निर्णय लेने में सहायता प्रदान करता है।
‘डिजिटल कोर्ट्स 2.1’ प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया है, जो न्यायिक अधिकारियों को एकीकृत जजमेंट डेटाबेस, एनोटेटेड दस्तावेज़ प्रबंधन, ऑटो-ड्राफ्टिंग टेम्पलेट्स और JustIS ऐप से कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है। इसमें वॉइस-टू-टेक्स्ट (ASR–SHRUTI) और अनुवाद (PANINI) सुविधाएं शामिल हैं, जिनसे आदेश और फैसले डिक्टेशन के माध्यम से तैयार किए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने IIT मद्रास के साथ मिलकर AI और ML आधारित टूल विकसित किए हैं, जो ई-फाइलिंग में खामियों का पता लगा सकते हैं। इसका प्रोटोटाइप 200 एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड के साथ साझा किया गया है। अन्य टूल—जैसे मेटाडेटा एक्सट्रैक्शन, डिफेक्ट क्योरिंग और ICMIS केस मैनेजमेंट इंटीग्रेशन—परीक्षण के चरण में हैं।
इसी तरह सुप्रीम कोर्ट का ‘SUPACE’ (Supreme Court Portal Assistance in Court Efficiency) AI प्रोजेक्ट अभी प्रयोगात्मक चरण में है। इसका उद्देश्य मामलों के तथ्य समझना और कानूनी मिसालों की स्मार्ट खोज करना है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि सभी AI पहलें नियंत्रित पायलटों तक सीमित हैं, ताकि सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से तकनीक का विस्तार किया जा सके। उच्च न्यायालय इन मूल्यांकनों के आधार पर दिशानिर्देश तैयार करेंगे।
AI के सुचारू एकीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक AI समिति गठित की है, जो इन परियोजनाओं की अवधारणा, क्रियान्वयन और निगरानी का काम करेगी। ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के फेज-III के तहत, 2023–24 में एआई और ब्लॉकचेन सहित भविष्य की तकनीकों के लिए ₹53.57 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
सरकार का कहना है कि न्यायालयों में AI का उपयोग प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने, लंबित मामलों का अनुमान लगाने, प्रक्रियाओं को स्वचालित करने और न्यायिक संचालन को सुगम बनाने के लिए किया जाएगा। ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट के तहत विकसित सभी AI टूल देशभर की judiciary को उपलब्ध कराए जाएंगे।
