1 अप्रैल 2026 से बदलेगा आयकर सिस्टम, नए टैक्स नियमों से टैक्सपेयर्स को राहत और सख्ती दोनों

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भारत में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल 2026 से आयकर प्रणाली में बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो देश के कर ढांचे को एक नई दिशा देने वाले हैं। सरकार द्वारा लागू किया जा रहा नया आयकर अधिनियम 2025 करीब छह दशक पुराने कानून की जगह लेगा और इसके जरिए टैक्स से जुड़े कई नियमों, प्रक्रियाओं और शब्दावली को सरल और आधुनिक बनाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब तक इस्तेमाल होने वाले फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर की जगह एक ही टैक्स ईयर लागू किया जाएगा, जिससे करदाताओं के लिए सिस्टम को समझना आसान हो जाएगा।

नए नियमों के तहत इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। वेतनभोगी लोगों के लिए 31 जुलाई की अंतिम तारीख पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन जो लोग ऑडिट के दायरे में नहीं आते, जैसे स्वरोजगार करने वाले या पेशेवर लोग, उन्हें अब 31 अगस्त तक रिटर्न दाखिल करने की सुविधा दी जाएगी। इससे उन्हें अपने खातों को व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।

Nirmala Sitharaman द्वारा घोषित नए प्रावधानों में निवेश और ट्रेडिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। फ्यूचर्स और ऑप्शंस में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाए जाने से डेरिवेटिव ट्रेडिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी। वहीं, हाउस रेंट अलाउंस से जुड़े नियमों को और सख्त बनाया गया है, जिससे टैक्स छूट लेने के लिए अब अधिक पारदर्शिता जरूरी होगी। कई मामलों में मकान मालिक की जानकारी जैसे पैन नंबर देना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके साथ ही कुछ बड़े शहरों को अधिक एचआरए छूट वाली श्रेणी में शामिल किया गया है, जिससे वहां रहने वाले लोगों को फायदा मिलेगा।

सरकार ने कुछ मामलों में करदाताओं को राहत भी दी है। कर्मचारियों को मिलने वाले भोजन संबंधी भत्तों पर टैक्स छूट बढ़ाई गई है और टैक्स-फ्री गिफ्ट की सीमा में भी इजाफा किया गया है। पुराने टैक्स सिस्टम का उपयोग करने वालों के लिए बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट को भी बढ़ाया गया है, जिससे मध्यम वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद है।

निवेश से जुड़े नियमों में भी बदलाव देखने को मिलेगा। अब शेयर बायबैक पर टैक्स डिविडेंड की तरह नहीं बल्कि कैपिटल गेन के रूप में लगाया जाएगा, जिससे निवेशकों की टैक्स प्लानिंग प्रभावित हो सकती है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाली टैक्स छूट को भी सीमित कर दिया गया है और यह केवल उन्हीं निवेशों पर लागू होगी जो मूल जारी के समय खरीदे गए हों। इसके अलावा, डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर लिए गए कर्ज के ब्याज को अब टैक्स छूट के रूप में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।

नई व्यवस्था में टीडीएस और टीसीएस से जुड़े नियमों को भी सरल बनाने की कोशिश की गई है। अब करदाता एक ही घोषणा पत्र के जरिए विभिन्न आय स्रोतों पर टीडीएस से राहत पा सकते हैं। एनआरआई से संपत्ति खरीदने पर टीडीएस काटने के लिए अब टीएएन की जरूरत नहीं होगी और केवल पैन के जरिए यह प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। विदेश यात्रा और शिक्षा या इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर टीसीएस दरों को भी कम किया गया है।

इसके अलावा, करदाता अब अपने आयकर रिटर्न में सुधार करने के लिए 31 मार्च तक संशोधन कर सकेंगे, हालांकि देर से संशोधन करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। मोटर दुर्घटना मुआवजे पर मिलने वाले ब्याज को पूरी तरह टैक्स फ्री कर दिया गया है, जो पीड़ितों के लिए राहत भरा कदम है।

सरकार ने नए आकलन वर्ष के लिए आईटीआर फॉर्म भी जारी कर दिए हैं, जिनमें कुछ अहम बदलाव किए गए हैं। अब आईटीआर-1 फॉर्म में दो मकानों से होने वाली आय को भी दिखाया जा सकेगा, जिससे कई करदाताओं के लिए रिटर्न फाइल करना पहले से ज्यादा आसान और स्पष्ट हो जाएगा।

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