ईरान पर हमलों के बाद तेल बाजार में उबाल, ब्रेंट और नाइमेक्स क्रूड 10% तक उछले
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला है। ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के हमलों की खबर सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया। एशियाई बाजार में सुबह के कारोबार के दौरान तेल के दामों में दस प्रतिशत से अधिक की वृद्धि ने निवेशकों और आयातक देशों की चिंता बढ़ा दी है।
अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। प्रति बैरल इसकी कीमत करीब 79.3 डॉलर तक पहुंच गई, जो पिछले सत्र की तुलना में लगभग नौ प्रतिशत अधिक है। इसी तरह अमेरिकी बाजार में कारोबार होने वाले नाइमेक्स लाइट स्वीट क्रूड के दाम भी साढ़े आठ प्रतिशत से अधिक बढ़कर 72.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए। कीमतों में यह अचानक आई तेजी बाजार की अस्थिरता और संभावित आपूर्ति संकट की आशंका को दर्शाती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं या निर्यात प्रभावित होता है, तो आपूर्ति में बाधा आ सकती है। इसी आशंका के चलते बाजार में खरीदारी बढ़ी और कीमतों ने ऊंची छलांग लगाई। निवेशकों को डर है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो तेल उत्पादक देशों के बीच तनाव और बढ़ सकता है, जिससे उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ेगा।
एशियाई बाजारों में तेल के दामों में आई इस तेजी का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। परिवहन लागत में वृद्धि से खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल बाजार की दिशा पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर है। यदि तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो कीमतों में कुछ स्थिरता आ सकती है। लेकिन यदि हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी जा सकती हैं।
तेल बाजार की मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन सकती है। सरकारें और कंपनियां वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और भंडारण रणनीतियों पर भी विचार तेज कर सकती हैं ताकि भविष्य में ऐसे झटकों से बचा जा सके। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजरें मध्य पूर्व की स्थिति, संभावित प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं पर टिकी रहेंगी, क्योंकि यही कारक तय करेंगे कि तेल की कीमतें किस दिशा में जाएंगी।
