लाडवा में सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर दो दिवसीय कृषि विकास मेला, जल संरक्षण थीम के साथ किसानों का सम्मान

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सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में हरियाणा के लाडवा में आयोजित दो दिवसीय कृषि विकास मेले ने किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को एक साझा मंच प्रदान किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान, कृषि विशेषज्ञ, महिलाएं और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। मेले का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों, जल संरक्षण के उपायों और कृषि में नवाचार को बढ़ावा देना रहा। पूरे परिसर में कृषि उपकरणों, उन्नत बीजों और नई तकनीकों की प्रदर्शनी ने किसानों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम के दौरान किसानों का सम्मान किया गया और उनके योगदान को सराहा गया। प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने नई तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर उत्पादन में वृद्धि की है। उनके प्रयासों को अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक बताया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में कृषि क्षेत्र में बदलाव और नवाचार की आवश्यकता है, ताकि किसान अधिक लाभ कमा सकें और खेती को टिकाऊ बनाया जा सके।

मेले की थीम “जल संरक्षण: प्रति बूंद से अधिक फसल” रखी गई थी, जो वर्तमान परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक मानी जा रही है। जल संकट की चुनौती को देखते हुए किसानों को ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर सिस्टम और वर्षा जल संचयन जैसे उपायों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि सीमित संसाधनों का सही उपयोग कर अधिक उत्पादन संभव है। जल संरक्षण को खेती की सफलता का मूल आधार बताया गया और किसानों से अपील की गई कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं।

यह मेला हरियाणा की कृषि आत्मा और अन्नदाताओं के परिश्रम का उत्सव बन गया। किसानों की भागीदारी और उत्साह ने आयोजन को सफल बनाया। मातृशक्ति की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही, जिन्होंने कृषि कार्यों में अपनी सक्रिय भूमिका को दर्शाया। महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों ने भी अपने उत्पादों और प्रयासों को प्रदर्शित किया, जिससे कार्यक्रम में विविधता और ऊर्जा का संचार हुआ।

आयोजकों ने कार्यक्रम की सफलता के लिए सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ऐसे आयोजन किसानों को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। साथ ही आगामी होली पर्व की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए आपसी प्रेम और सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया गया। लाडवा की धरती पर आयोजित यह कृषि विकास मेला केवल एक प्रदर्शनी नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार, जल संरक्षण और सामूहिक प्रगति का प्रतीक बनकर उभरा।

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