लोहाघाट में खड़ी होली का भव्य आयोजन, जनसैलाब के बीच दिखा उत्साह और अपार जनसमर्थन
उत्तराखंड के चंपावत जिले के लोहाघाट में खड़ी होली के पावन अवसर पर इस बार उत्साह और उमंग का अद्भुत नजारा देखने को मिला। पर्व के मौके पर बड़ी संख्या में मातृशक्ति, वरिष्ठजन, युवा और बच्चे एकत्रित हुए और पूरे क्षेत्र में उल्लास का वातावरण बन गया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोग जब एक साथ लोकधुनों पर झूमते नजर आए तो पूरा नगर मानो रंग और राग में डूब गया। यह आयोजन केवल एक त्योहार नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बनकर सामने आया।
खड़ी होली उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। इसमें लोग गोल घेरा बनाकर पारंपरिक गीत गाते हुए ताल से ताल मिलाते हैं। लोहाघाट में आयोजित इस कार्यक्रम में भी यही दृश्य देखने को मिला। ढोल और मंजीरे की थाप पर जब होली के पारंपरिक गीत गूंजे तो उपस्थित जनसमूह भावविभोर हो उठा। खास बात यह रही कि इस बार महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। मातृशक्ति ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया और अपनी उपस्थिति से आयोजन की गरिमा बढ़ाई।
वरिष्ठजनों की मौजूदगी ने आयोजन को और भी खास बना दिया। उन्होंने न केवल युवा पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का संदेश दिया बल्कि खुद भी गीत-संगीत में शामिल होकर यह साबित किया कि संस्कृति की जड़ें पीढ़ियों को आपस में जोड़ती हैं। बच्चों और युवाओं में भी जबरदस्त उत्साह देखा गया। कई युवा पारंपरिक परिधान में नजर आए, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि नई पीढ़ी भी अपनी लोकसंस्कृति को संजोकर रखने के लिए तत्पर है।
कार्यक्रम के दौरान लोगों के बीच आपसी स्नेह और अपनत्व साफ झलक रहा था। उपस्थित जनसमूह ने जिस गर्मजोशी से एक-दूसरे का स्वागत किया, उसने आयोजन को पारिवारिक माहौल दे दिया। रंगों की हल्की फुहार और लोकगीतों की मधुर धुनों के बीच हर चेहरा खुशी से दमकता नजर आया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा लोहाघाट एक परिवार की तरह इस पर्व को मना रहा हो।
इस भव्य आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि पारंपरिक त्योहार केवल उत्सव का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे समाज को एकजुट रखने की ताकत भी रखते हैं। खड़ी होली जैसे सांस्कृतिक पर्व लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और क्षेत्रीय पहचान को मजबूत करते हैं। आयोजन में उमड़ी भारी भीड़ और लोगों का उत्साह यह दर्शाता है कि लोहाघाट में सांस्कृतिक चेतना जीवंत है और लोग अपनी विरासत पर गर्व महसूस करते हैं।
समारोह के अंत में उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया और उनके स्नेह, प्रेम और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया गया। यह आयोजन आने वाले समय में भी इसी तरह सामूहिक सहभागिता और उल्लास के साथ मनाया जाता रहेगा, ऐसी उम्मीद जताई गई। लोहाघाट की खड़ी होली ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब समाज एक साथ आता है तो पर्व केवल परंपरा नहीं बल्कि यादगार अनुभव बन जाता है।
