एलपीजी सिलेंडर बुकिंग पर सरकार का बड़ा फैसला: अब 21 नहीं 25 दिन बाद ही होगी दोबारा बुकिंग
वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और प्राकृतिक गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर की दोबारा बुकिंग के बीच का समय बढ़ाकर 21 दिन से 25 दिन कर दिया है। इस कदम का उद्देश्य बाजार में संभावित जमाखोरी को रोकना और आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण ऊर्जा बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है। इसी वजह से सरकार ने एहतियात के तौर पर यह निर्णय लिया है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि देश में फिलहाल एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता है और आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बुकिंग की अवधि बढ़ाने का फैसला मुख्य रूप से इसलिए लिया गया है ताकि घबराहट में होने वाली अधिक खरीदारी और जमाखोरी जैसी स्थितियों से बचा जा सके। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते कई स्थानों पर एलपीजी सिलेंडर की मांग में अचानक बढ़ोतरी देखी गई थी। अनुमान है कि इस वजह से मांग में लगभग 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि आम तौर पर एक भारतीय परिवार साल भर में 14.2 किलोग्राम के करीब सात से आठ एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करता है। इस हिसाब से अधिकांश परिवारों को छह सप्ताह से पहले सिलेंडर रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए बुकिंग के बीच चार दिन का अतिरिक्त अंतराल जोड़ने से सामान्य उपभोक्ताओं की जरूरतों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इससे बाजार में अनावश्यक दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर पहुंचने के बावजूद फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने संकेत दिया है कि तेल विपणन कंपनियां अभी के लिए बढ़ती लागत का दबाव स्वयं वहन करेंगी। इससे आम लोगों को तत्काल राहत मिलेगी और ईंधन की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से बचाव हो सकेगा।
सरकार वैश्विक तेल बाजारों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और परिस्थितियों के अनुसार आगे के फैसले लिए जाएंगे। इसके साथ ही देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के लिए तेल भंडारण क्षमता को भी पर्याप्त स्तर पर रखा गया है। वर्तमान समय में भारत के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को मिलाकर कुल 74 दिनों तक की आपूर्ति का भंडारण उपलब्ध है। इसमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार भी शामिल है, जो किसी भी भू-राजनीतिक संकट या आपूर्ति में बाधा आने की स्थिति में एक सुरक्षा कवच के रूप में काम करता है।
रणनीतिक भंडार की क्षमता लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है, जो देश की करीब साढ़े नौ दिनों की कच्चे तेल की जरूरत को पूरा करने में सक्षम है। इसके अलावा तेल विपणन कंपनियों के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का लगभग 64.5 दिनों का अतिरिक्त भंडार मौजूद है। इस तरह कुल मिलाकर देश की ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त तैयारी की गई है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर घरेलू बाजार पर सीमित रखा जा सके।
