कोल्लम NH-66 हादसा: एनएचएआई ने ठेकेदार और हिस्सेदारों पर तीन साल का प्रतिबंध, आर्थिक दंड भी लगाया

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने केरल के कोल्लम जिले में एनएच-66 पर निर्माणाधीन राजमार्ग की दीवार ढहने और सर्विस रोड धंसने की घटना के बाद सख्त कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने परियोजना के ठेकेदार और उसके मुख्य हिस्सेदारों को तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित करते हुए आर्थिक दंड लगाया है। इसके साथ ही परियोजना के स्वतंत्र अभियंता पर दो वर्ष का प्रतिबंध लगाते हुए दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों को साइट से तत्काल हटा दिया गया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार घटना के तुरंत बाद भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के विशेषज्ञों की एक टीम ने स्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि हादसे की मुख्य वजह अधूरी भू-तकनीकी जांच और नींव को मजबूत बनाने के आवश्यक तकनीकी उपायों की अनदेखी रही।
मंत्रालय ने बताया कि कोट्टियम के पास किलोमीटर 504.400 पर बने 22.9 मीटर लंबे अंडरपास के समीप 9.4 मीटर ऊंचे कृत्रिम उत्थान में गहरे कटाव के कारण ढांचा ध्वस्त हुआ। रिपोर्ट में स्पष्ट है कि ठेकेदार ने न तो उचित भू-तकनीकी जांच की और न ही अनिवार्य सुदृढ़ीकरण उपाय अपनाए, जिसके चलते दीवार धंस गई।
घटना के बाद एनएचएआई ने ठेकेदार, उसके हिस्सेदारों और स्वतंत्र अभियंता को एक महीने के लिए बोली प्रक्रिया से निलंबित कर दिया था। इसके बाद दिसंबर को तीन वर्ष (ठेकेदार व हिस्सेदारों के लिए) और दो वर्ष (स्वतंत्र अभियंता के लिए) तक प्रतिबंध तथा आर्थिक दंड लगाने हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। परियोजना प्रबंधक और स्वतंत्र अभियंता के निवासी अभियंता को भी तत्काल प्रभाव से हटाया गया।
यह परियोजना कोल्लम–कदम्बट्टुकोनम मार्ग पर निर्माण, संचालन और संधारण (BoT) मॉडल के तहत चलाई जा रही थी, जिसे मेसर्स शिवालया कंस्ट्रक्शन्स के सहयोग से लागू किया जा रहा था। स्वतंत्र अभियंता के रूप में मेसर्स फीडबैक इंफ्रा और मेसर्स सत्रा सर्विसेज की संयुक्त टीम कार्यरत थी। परियोजना की निगरानी एनएचएआई तिरुवनंतपुरम इकाई के परियोजना निदेशक डीपी साहू कर रहे थे।
घटना की विस्तृत जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है, जिसमें आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ डॉ. जिमी थॉमस और आईआईटी पलक्कड़ के सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीश टी.के. शामिल हैं।
