कृषि को नई ऊर्जा देने पर जोर: पीएम नरेंद्र मोदी बोले– भारत की खेती को बनाना होगा एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर बजट के बाद आयोजित एक महत्वपूर्ण वेबिनार को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश के कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा और नई दिशा देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के बजट में कृषि और ग्रामीण विकास को मजबूत बनाने के लिए कई नए कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस वेबिनार में हुई चर्चा और विशेषज्ञों से मिले सुझाव बजट में किए गए प्रावधानों को जल्द से जल्द जमीन पर लागू करने में मदद करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया के बाजार तेजी से बदल रहे हैं और वैश्विक स्तर पर मांग के स्वरूप में भी बदलाव आ रहा है। ऐसे में भारत के किसानों के लिए यह एक बड़ा अवसर है कि वे अपनी खेती को निर्यात के अनुकूल बनाएं। उन्होंने कहा कि भारत के पास विविध जलवायु परिस्थितियां हैं और देश में कई तरह के एग्रो-क्लाइमेटिक जोन मौजूद हैं। इन परिस्थितियों का सही तरीके से उपयोग करके भारतीय कृषि को वैश्विक बाजार में मजबूत स्थान दिलाया जा सकता है। उन्होंने इस दिशा में अधिक से अधिक चर्चा और ठोस रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि इस बार के बजट में हाई वैल्यू एग्रीकल्चर को विशेष प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि नारियल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं, जिससे विशेष रूप से दक्षिण भारत के किसानों को लाभ होगा। साथ ही पूर्वोत्तर भारत की फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए भी बजट में कई प्रावधान किए गए हैं, जिससे उस क्षेत्र के किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी और स्थानीय कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का रास्ता मजबूत होगा।

वेबिनार में कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास से जुड़े मंत्रालयों के अधिकारी और विशेषज्ञ भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट पेश होने के बाद अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की है कि उसके हर प्रावधान का पूरा लाभ देश को मिल सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बजट में निर्धारित हर राशि का सही उपयोग हो और जिन लोगों के लिए यह योजनाएं बनाई गई हैं, उन्हें जल्द से जल्द इसका लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए उन्होंने विशेषज्ञों और अधिकारियों से ठोस सुझाव देने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है। कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं है बल्कि देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ भी है। इसी सोच के साथ सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।

उन्होंने बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से लगभग 10 करोड़ किसानों को अब तक चार लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। इसके अलावा न्यूनतम समर्थन मूल्य में सुधार के कारण किसानों को लागत के मुकाबले बेहतर लाभ मिलने लगा है। संस्थागत ऋण की पहुंच भी बढ़ी है और अब यह 75 प्रतिशत से अधिक किसानों तक पहुंच चुका है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत लगभग दो लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटान किया जा चुका है, जिससे किसानों के जोखिम में काफी कमी आई है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है।

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