भारत को वैश्विक एआई नेतृत्व की ओर ले जाने पर जोर, पीएम मोदी ने सीईओ और विशेषज्ञों से किया मंथन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के क्षेत्र में काम कर रहे प्रमुख सीईओ और विशेषज्ञों के साथ विस्तृत संवाद किया। इस चर्चा में भारत में एआई के भविष्य, नवाचार को बढ़ावा देने, नैतिकता, डेटा सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में देश की भूमिका पर गहन विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक फरवरी में प्रस्तावित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के मद्देनज़र आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना और भारत के एआई मिशन को नई गति देना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को सभी क्षेत्रों में नई तकनीकों को तेजी से अपनाना होगा और स्वदेशी तकनीक के ज़रिये राष्ट्रीय विकास को आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने जोर दिया कि एआई समाधानों को देश की ज़रूरतों और सामाजिक वास्तविकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने यूपीआई का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह भारत ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया को एक सफल मॉडल दिया है, उसी तरह एआई के क्षेत्र में भी वैश्विक मानक स्थापित किए जा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की विशालता, विविधता और मजबूत लोकतांत्रिक ढांचे के कारण दुनिया भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भरोसा करती है। उन्होंने विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे भारत को वैश्विक एआई प्रयासों का केंद्र बनाने में योगदान दें। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के विकास में डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और नैतिकता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
पीएम मोदी ने एआई कौशल विकास और प्रतिभा निर्माण को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि भारत का एआई इकोसिस्टम देश के मूल्यों, संस्कृति और मानव-केंद्रित सोच को दर्शाना चाहिए। इस उच्चस्तरीय बैठक में विप्रो, टीसीएस, एचसीएल टेक, जोहो, एलटीआई माइंडट्री, जियो प्लेटफॉर्म्स, अदाणी कॉनेक्स समेत कई बड़ी कंपनियों के सीईओ और आईआईटी व आईआईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी इस दौरान मौजूद रहे।
