पश्चिम एशिया युद्ध पर पीएम मोदी की चेतावनी, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए भारत पूरी तरह तैयार

Untitled-2
Share this post

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि इस युद्ध का असर पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है। उन्होंने संसद के उच्च सदन में अपने संबोधन के दौरान स्पष्ट किया कि इस संघर्ष को तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है और इसके चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बन गई है, क्योंकि इससे न केवल ईंधन की कीमतों पर असर पड़ सकता है, बल्कि व्यापार के रास्तों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस स्थिति से पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसी आवश्यक चीजों की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि देश किसी एक ही ऊर्जा स्रोत पर अत्यधिक निर्भर न रहे। इसी दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है और घरेलू गैस आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए एलपीजी के साथ-साथ पीएनजी के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीते दशक में पीएनजी कनेक्शन के विस्तार में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और हाल के समय में इस प्रक्रिया को और तेज किया गया है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश ने पिछले कुछ वर्षों में ऊर्जा आयात के क्षेत्र में विविधता लाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले जहां भारत सीमित देशों से ही ऊर्जा आयात करता था, वहीं अब यह संख्या काफी बढ़ चुकी है। इससे किसी एक क्षेत्र में उत्पन्न संकट का असर सीधे तौर पर भारत की आपूर्ति पर नहीं पड़ता। इसके साथ ही देश ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को भी मजबूत किया है, ताकि आपातकालीन स्थितियों में ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में भारत ने बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम रिजर्व तैयार किए हैं और इस दिशा में काम अभी भी जारी है। इसके अलावा रिफाइनिंग क्षमता में भी वृद्धि की गई है, जिससे देश अपनी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर सके। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडारण और लगातार आपूर्ति बनाए रखने की व्यवस्था मौजूद है।

प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि सरकार हर क्षेत्र में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से शिपिंग सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में भारत का अधिकांश तेल विदेशी जहाजों के माध्यम से आता है, जो किसी भी वैश्विक संकट के दौरान जोखिम पैदा कर सकता है। इस चुनौती से निपटने के लिए देश में ही जहाज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है और इस क्षेत्र में बड़े निवेश किए जा रहे हैं।

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति का जिक्र किया और कहा कि अब भारत अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार खुद ही बना रहा है। साथ ही, दवाओं के कच्चे माल और रेयर अर्थ मिनरल्स के क्षेत्र में भी विदेशी निर्भरता कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऐसे में देश को हर चुनौती के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने नागरिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी सतर्कता और गंभीरता के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए है और देश के हित में हर जरूरी कदम उठा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *