सड़क सुरक्षा फोर्स के दो साल पूरे,सड़क सुरक्षा फोर्स ने हजारों जानें बचाईं
राज्य के लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गठित देश की पहली ‘सड़क सुरक्षा फोर्स’ ने आज अपने दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। इन दो वर्षों में इस अनोखी पहल ने जो परिणाम दिए हैं, वे न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन चुके हैं। सरकार के अनुसार सड़क सुरक्षा फोर्स के गठन के बाद सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में लगभग 48 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सड़क सुरक्षा फोर्स यानी एसएसएफ को इस सोच के साथ तैयार किया गया था कि दुर्घटना के बाद का हर मिनट बेहद कीमती होता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए एसएसएफ की टीमों को अत्याधुनिक प्रशिक्षण और संसाधनों से लैस किया गया। आज स्थिति यह है कि सड़क हादसे की सूचना मिलते ही एसएसएफ की टीमें मात्र 5 से 7 मिनट के भीतर दुर्घटनास्थल पर पहुंच जाती हैं और घायलों को तुरंत प्राथमिक उपचार देते हुए नजदीकी अस्पताल तक पहुंचाया जाता है। समय पर मिली इस मदद के कारण हजारों लोगों की जान बचाई जा सकी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पहले सड़क दुर्घटना के बाद एंबुलेंस या पुलिस के पहुंचने में काफी समय लग जाता था, जिससे कई बार घायलों की हालत गंभीर हो जाती थी। एसएसएफ के आने के बाद यह स्थिति पूरी तरह बदल गई है। प्रशिक्षित कर्मी न केवल घायलों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालते हैं, बल्कि मौके पर ही जरूरी मेडिकल सहायता भी प्रदान करते हैं। इससे अस्पताल पहुंचने से पहले ही मरीज की हालत स्थिर रखने में मदद मिलती है।
इस पहल की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब अन्य राज्य भी इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। कई राज्यों की सरकारों ने सड़क सुरक्षा फोर्स के मॉडल को समझने और अपने यहां लागू करने के लिए राज्य सरकार से संपर्क किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल देशभर में लागू किया जाता है तो सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में बड़ी कमी लाई जा सकती है।
सरकार का कहना है कि राज्य के हर नागरिक का जीवन उनके लिए अनमोल है और उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सड़क सुरक्षा फोर्स उसी सोच का साकार रूप है, जिसमें तकनीक, त्वरित प्रतिक्रिया और मानवीय संवेदनशीलता का बेहतरीन तालमेल देखने को मिलता है। आने वाले समय में एसएसएफ को और मजबूत किया जाएगा, ताकि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में भी यह सेवा और अधिक प्रभावी तरीके से पहुंच सके।
दो वर्षों की इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीति, नीयत और तकनीक सही दिशा में काम करें तो सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर भी बड़े और सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। सड़क सुरक्षा फोर्स आज न सिर्फ एक सरकारी इकाई है, बल्कि आम लोगों के लिए भरोसे का दूसरा नाम बन चुकी है।
