उत्तराखण्ड में कानून-व्यवस्था पर सख्ती, पुलिस-प्रशासन को लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस के निर्देश

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उत्तराखण्ड प्रदेश सचिवालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जनसेवा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में अखिल भारतीय डीजी और आईजी सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्षों पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि शासन और प्रशासन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने साफ किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं होगा और सभी विभागों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा।

बैठक में पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे आम जनमानस के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण अपनाएं। यह स्पष्ट किया गया कि जनसेवा केवल औपचारिकता नहीं बल्कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों से कहा गया कि जनता की समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि शासन पर लोगों का भरोसा और मजबूत हो सके।

पुलिस व्यवस्था में सुधार को लेकर बैठक में विशेष जोर दिया गया। थाना स्तर तक वर्क कल्चर में सुधार लाने, आम नागरिकों के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने तथा निर्दोष लोगों को परेशान किए जाने की शिकायतों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस की कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए जिससे आम आदमी खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे।

बैठक में लैंड फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर भी गंभीर चिंता जताई गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि भूमि धोखाधड़ी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाए जाएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सरकार का मानना है कि लैंड फ्रॉड न केवल आम लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि सामाजिक असंतोष भी पैदा करता है, इसलिए इस पर सख्ती जरूरी है।

अपराध नियंत्रण को लेकर बैठक में यह भी कहा गया कि केवल कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक आत्ममंथन और विभागीय समन्वय भी उतना ही जरूरी है। सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें और अपराध पर नियंत्रण के लिए ठोस रणनीति अपनाएं। सरकार ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था राज्य की पहचान और विकास से सीधे जुड़ी हुई है।

बैठक में दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे के खुलने से राज्य में पर्यटन के क्षेत्र में होने वाली संभावित वृद्धि को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि होटल, आवास, पार्किंग, ट्रैफिक प्लान, यातायात व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। बढ़ते पर्यटकों की संख्या को देखते हुए किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचने पर विशेष जोर दिया गया।

कैंची धाम बाईपास को जून तक पूर्ण करने के निर्देश भी बैठक में दिए गए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम यातायात सुविधा मिल सके। इसके साथ ही चारधाम यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सड़कों के डामरीकरण का कार्य 15 फरवरी से गुणवत्ता के साथ शुरू करने के निर्देश दिए गए। सरकार ने कहा कि चारधाम यात्रा राज्य की आस्था और अर्थव्यवस्था दोनों से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

इस उच्चस्तरीय बैठक के माध्यम से सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि उत्तराखण्ड में सुशासन, सख्त कानून-व्यवस्था और जनहित सर्वोपरि हैं और इन्हें लागू करने में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

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