उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता के एक वर्ष पूरा होने पर संशोधन अध्यादेश लागू

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उत्तराखंड सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) लागू हुए एक साल पूरा होने पर UCC संशोधन अध्यादेश 2026 को लागू कर दिया है। यह अध्यादेश राज्यपाल की मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और शादी, रजिस्ट्रेशन, लिव-इन रिश्ते समेत कई प्रावधानों को और स्पष्ट तथा सख्त बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।

अधिनियम में किए गए नए बदलावों के तहत शादी के समय पहचान छिपाना या गलत जानकारी देना अब विवाह को रद्द करने का कारण माना जाएगा। इसके अलावा विवाह और लिव-इन रिश्तों में जबरदस्ती, धोखाधड़ी या गैरकानूनी तरीके अपनाने पर कठोर दंडात्मक प्रावधान किए गए हैं। उन दंपतियों के लिए भी पंजीकरण अनिवार्य है जिन्होंने 2010 से 26 जनवरी 2026 तक विवाह किया है।

संशोधन में यह भी तय किया गया है कि अगर निर्धारित समय-सीमा के भीतर उप-रजिस्ट्रार कार्रवाई नहीं करता है, तो मामला अपने आप रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार-जनरल के पास जाएगा। रजिस्ट्रार-जनरल को विवाह, तलाक, लिव-इन रिश्तों और उत्तराधिकार से जुड़े रजिस्ट्रेशन रद्द करने की शक्ति दी गई है। साथ ही अब लिव-इन रिश्तों के समाप्त होने पर रजिस्ट्रार द्वारा टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा और ‘विडो’ शब्द की जगह ‘स्पाउज़’ शब्द का उपयोग होगा।

राज्य सरकार का कहना है कि इन संशोधनों से UCC की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सामाजिक न्याय की दिशा में मजबूत होगी। पिछले एक वर्ष में विवाह पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और लिव-इन रिश्तों का भी पंजीकरण शुरु हुआ है, जिससे कानूनी सुरक्षा बनी है।

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