उत्तराखंड को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 को मंजूरी
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 को कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 किलोटन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। सरकार का मानना है कि इस नीति से न केवल राज्य में स्वच्छ ईंधन का उपयोग बढ़ेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर निवेश को भी आकर्षित किया जा सकेगा।
ग्रीन हाइड्रोजन नीति में उत्पादकों को कई अहम रियायतें देने का प्रावधान किया गया है। सोलर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित बिजली का उपयोग करने वाले हरित हाइड्रोजन उत्पादकों को टैक्स, अतिरिक्त सरचार्ज और क्रॉस सब्सिडी सरचार्ज में छूट दी जाएगी। इसके साथ ही हाइड्रोजन प्लांट को राज्य के भीतर प्राकृतिक और नवीकरणीय ऊर्जा से मिलने वाली बिजली पर ट्रांसमिशन शुल्क और व्हीलिंग शुल्क में भी राहत देने पर सहमति बनी है।
सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन को एक उद्योग के रूप में मान्यता देने का फैसला किया है, जिससे निवेशकों को उद्योगों से जुड़ी सुविधाएं और प्रोत्साहन मिल सकेंगे। इससे उत्तराखंड को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान मिलने की उम्मीद है। नीति के जरिए राज्य सरकार कार्बन उत्सर्जन कम करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा करना चाहती है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति को उत्तराखंड के ऊर्जा क्षेत्र में एक दूरगामी और ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
