नए VB-G RAM G मॉडल से राज्यों को बड़ी राहत, एसबीआई ने जताया 17 हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त लाभ का अनुमान

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक अहम रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र और राज्यों के बीच फंड के बंटवारे के लिए प्रस्तावित नए VB-G RAM G ढांचे से राज्यों को बड़ा फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर इस नए मॉडल को लागू किया जाता है तो राज्यों को पिछले सात वर्षों के औसत आवंटन की तुलना में करीब सत्रह हजार करोड़ रुपये अधिक मिल सकते हैं। यह आकलन केंद्र के हिस्से पर आधारित एक नॉर्मेटिव यानी वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन मॉडल के जरिए किया गया है, जिसमें राज्यों की जरूरतों और उनके प्रदर्शन दोनों को ध्यान में रखा गया है।
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्या कांति घोष ने बताया कि इस मॉडल में इक्विटी और एफिशिएंसी यानी समानता और दक्षता के दो प्रमुख सिद्धांतों को आधार बनाया गया है। इक्विटी के तहत उन राज्यों को ज्यादा वित्तीय गुंजाइश देने की बात कही गई है जहां संरचनात्मक जरूरतें ज्यादा हैं, ग्रामीण श्रम पर निर्भरता अधिक है और प्रशासनिक दायरा बड़ा है, जबकि एफिशिएंसी के तहत उन राज्यों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था है जो मिले हुए संसाधनों से स्थायी रोजगार, मजबूत परिसंपत्तियां और समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित कर पाते हैं।
रिपोर्ट में FY19 से FY25 के बीच मनरेगा के तहत हुए औसत आवंटन की तुलना इस नॉर्मेटिव आकलन से की गई है, जिसमें कोविड के साल FY21 को बाहर रखा गया है। इस तुलना से सामने आया कि लगभग सभी राज्य इस नए ढांचे में लाभ की स्थिति में रहेंगे और केवल दो राज्यों को मामूली नुकसान हो सकता है। तमिलनाडु के संदर्भ में भी कहा गया है कि अगर FY24 जैसे असाधारण वर्ष को हटा दिया जाए तो वहां होने वाला नुकसान लगभग खत्म हो जाता है।
राज्यों के बीच लाभ के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सबसे आगे बताए गए हैं, जबकि बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात भी बड़े लाभार्थियों में शामिल हैं। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि अगर फंड आवंटन के लिए इस तरह के पारदर्शी और वस्तुनिष्ठ मानदंड अपनाए जाते हैं तो इससे विकसित और पिछड़े दोनों तरह के राज्यों को संतुलित तरीके से फायदा मिलेगा और रोजगार सृजन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
