पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 150 सत्र न्यायाधीश और 7 पूर्व हाईकोर्ट जज होंगे तैनात
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और न्यायिक पहल की गई है। सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों के अनुपालन में जिला सत्र न्यायालयों से 150 न्यायाधीशों को इस प्रक्रिया में सहयोग के लिए नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है। यह कदम मतदाता सूची के सत्यापन और अंतिम निपटान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार, केवल सत्र न्यायाधीश ही नहीं बल्कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के सात पूर्व न्यायाधीशों को भी इस प्रक्रिया के लिए चिन्हित किया गया है। इन वरिष्ठ न्यायिक अधिकारियों की भागीदारी से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण का कार्य पूरी तरह से न्यायालय के दिशानिर्देशों के अनुरूप और निष्पक्ष ढंग से पूरा हो। आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय किए गए मानकों और नियमों के आधार पर ही आगे बढ़ेगी।
इस मुद्दे को लेकर आज एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई। इस बैठक में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, राज्य के मुख्य सचिव, मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य के महाधिवक्ता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में एसआईआर प्रक्रिया की रूपरेखा, न्यायिक अधिकारियों की भूमिका और सुनवाई की प्रणाली पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची से जुड़े हर दावे और आपत्ति का निपटारा निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बैठक के बाद स्पष्ट किया कि आयोग का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के सभी पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना है। उन्होंने कहा कि सत्यापन और सूचना निपटान की प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जा रही है और यह कार्य आज मध्यरात्रि तक जारी रहेगा। आयोग इस बात को लेकर सजग है कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम सूची से छूटने न पाए और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल न हो।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार, अंतिम निपटान प्रक्रिया न्यायिक अधिकारियों के माध्यम से ही संपन्न की जाएगी। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वास बढ़ने की उम्मीद है। आयोग ने सुझाव दिया है कि निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर सुनवाई आयोजित की जाए, जिससे संबंधित पक्षों के लिए प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो सके। हालांकि इस विषय पर अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर काफी चर्चा रही है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति से यह संकेत मिलता है कि पूरी प्रक्रिया को संवैधानिक दायरे में रखते हुए पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पहल से मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता में कितना सुधार आता है।
