आयुष मार्क क्या है और भारत की दवाओं पर इसका क्या होगा असर, जानिए पूरी जानकारी
भारत ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष मंत्रालय की नई पहल के तहत ‘आयुष मार्क’ को लॉन्च कर दिया है। यह घोषणा नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित दूसरे WHO ग्लोबल समिट ऑन ट्रेडिशनल मेडिसिन के दौरान की गई। 17 से 19 दिसंबर 2025 तक चले इस वैश्विक सम्मेलन में दुनिया भर के विशेषज्ञों ने पारंपरिक चिकित्सा की भूमिका, भविष्य और वैज्ञानिक आधार पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब पारंपरिक चिकित्सा को केवल विरासत के रूप में नहीं, बल्कि प्रमाण आधारित और लोगों के केंद्र में रहने वाली आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के तौर पर आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक पद्धतियां अब वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना रही हैं और आयुष मार्क इसी दिशा में एक मजबूत कदम है।
आयुष मार्क दरअसल आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किया जाने वाला एक विशेष गुणवत्ता लेबल है। यह आयुर्वेद, योग, नेचुरोपैथी, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी से जुड़े उत्पादों और सेवाओं को दिया जाएगा। इस मार्क का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिन दवाओं या सेवाओं पर यह लेबल लगा होगा, वे गुणवत्ता, सुरक्षा और मानक निर्माण प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करती हों। आसान शब्दों में कहें तो आयुष मार्क पारंपरिक चिकित्सा के लिए भरोसे की मुहर की तरह काम करेगा।
सरकार का मानना है कि आयुष मार्क को वैश्विक गुणवत्ता मानक के रूप में विकसित किया गया है। इससे न सिर्फ देश में बनी आयुष दवाओं की साख मजबूत होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को नई पहचान मिलेगी। विदेशों में अक्सर आयुष उत्पादों की गुणवत्ता और मानकों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में यह लेबल उन शंकाओं को दूर करने में मदद करेगा।
गौरतलब है कि आयुष सर्टिफिकेशन कोई नई व्यवस्था नहीं है। इसे क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा साल 2009 से संचालित किया जा रहा है। पहले से मौजूद व्यवस्था में दो स्तर के सर्टिफिकेशन होते हैं। पहला आयुष स्टैंडर्ड मार्क, जो आयुर्वेद, सिद्ध और यूनानी दवाओं के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस पर आधारित है। दूसरा आयुष प्रीमियम मार्क, जो WHO की GMP गाइडलाइंस के अनुसार हर्बल दवाओं को दिया जाता है। नया आयुष मार्क इन्हीं मानकों को और मजबूत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की कोशिश है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मौके पर यह भी कहा कि जामनगर में WHO का ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन स्थापित होना भारत के लिए गर्व की बात है। यह दुनिया के भारत पर बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर भारत वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
आयुष मार्क के साथ-साथ इस समिट में कई और अहम पहलों की भी शुरुआत की गई। इनमें My Ayush Integrated Services Portal शामिल है, जो आयुष ग्रिड का मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा। इसके अलावा अश्वगंधा पर स्मारक डाक टिकट जारी किया गया, योग प्रशिक्षण पर WHO की तकनीकी रिपोर्ट लॉन्च की गई और “From Roots to Global Reach: 11 Years of Transformation in Ayush” नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
कुल मिलाकर आयुष मार्क भारतीय पारंपरिक दवाओं और उपचार पद्धतियों के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है, जो गुणवत्ता, भरोसे और वैश्विक स्वीकार्यता को नई ऊंचाई देने का काम करेगा।
