जनऔषधि केंद्रों में युवाओं की सेवा: सस्ती दवाओं से मरीजों को मिल रही राहत

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देश के बड़े अस्पतालों में मरीजों की भीड़ और इलाज से जुड़ी चिंताओं के बीच युवा फार्मासिस्ट सहानुभूतिपूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा की नई मिसाल पेश कर रहे हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के व्यस्त परिसर में स्थित प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के जनऔषधि केंद्र पर यह बदलाव साफ तौर पर दिखाई देता है। यहां आने वाले मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं काफी कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे उन्हें इलाज के साथ आर्थिक राहत भी मिलती है।

इस केंद्र में काम करने वाले युवा फार्मासिस्ट पूरे समर्पण के साथ मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैं। वरिष्ठ फार्मासिस्ट संगीता अक्टूबर 2024 में इस केंद्र के शुरू होने के बाद से ही यहां काम कर रही हैं। उन्होंने लोगों की मदद करने की भावना से इस मिशन से जुड़ने का फैसला किया था। हर सुबह वह नए उत्साह और जिम्मेदारी के साथ केंद्र पहुंचती हैं और दिनभर मरीजों की जरूरतों को समझते हुए उन्हें दवाएं उपलब्ध कराती हैं।

संगीता बताती हैं कि अक्सर मरीज डॉक्टर की पर्ची लेकर जब यहां आते हैं तो उनके चेहरे पर चिंता साफ नजर आती है। कई लोग यह सोचकर परेशान रहते हैं कि दवाओं की कीमत ज्यादा होगी और उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन जब उन्हें जनऔषधि केंद्र पर वही दवाएं काफी कम कीमत पर मिलती हैं, तो उनके चेहरे पर राहत साफ दिखाई देती है। मरीजों की आंखों में दिखने वाली संतुष्टि और मुस्कान ही उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन जाती है और यही उन्हें हर दिन बेहतर काम करने के लिए उत्साहित करती है।

इस केंद्र पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग दवाएं लेने पहुंचते हैं। औसतन हर दिन लगभग 150 से 200 मरीज यहां आते हैं। सुबह के समय सबसे ज्यादा भीड़ रहती है और जल्दी ही लंबी कतारें लग जाती हैं। संगीता और उनके साथ काम करने वाले अन्य युवा कर्मचारी मिलकर पर्चियों की जांच करते हैं, दवाओं का सही प्रबंधन करते हैं, बिलिंग की प्रक्रिया संभालते हैं और मरीजों को दवाओं के सही उपयोग के बारे में समझाते हैं। व्यस्त माहौल के बावजूद उनका मुख्य उद्देश्य यही रहता है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को किफायती दवाएं मिल सकें।

युवा फार्मासिस्ट वरुण अग्रवाल भी इस मिशन का हिस्सा बनकर खुद को गर्व महसूस करते हैं। हाल ही में फार्मेसी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने जनऔषधि केंद्र से जुड़ने का निर्णय लिया। वह बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान ही उन्हें इस पहल के बारे में जानकारी मिली थी और तभी उन्होंने तय कर लिया था कि वह इस प्रयास का हिस्सा बनेंगे। उनके अनुसार अब लोगों में जेनेरिक दवाओं को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और खासकर बुजुर्ग मरीज इस केंद्र पर भरोसे के साथ आते हैं।

इसी तरह इंदिरा गांधी अस्पताल के जनऔषधि केंद्र में भी मरीजों को किफायती दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यहां के फार्मासिस्ट और प्रबंधक पीयूष का कहना है कि इस मिशन का हिस्सा बनना उनके लिए गर्व की बात है। यहां भी रोजाना करीब 150 से 200 लोग दवाएं लेने आते हैं। उनका मानना है कि जब कोई व्यक्ति चिंता के साथ यहां आता है और राहत के साथ वापस जाता है, तो वही इस काम की असली सफलता होती है।

इन केंद्रों में युवाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। हिमांशु कुमार जैसे कई युवा फार्मासिस्ट अपनी टीम के साथ पूरी लगन से काम कर रहे हैं। उनके साथ चार अन्य कर्मचारी भी काम करते हैं, जो बिलिंग और दवाओं के वितरण की जिम्मेदारी संभालते हैं। दिल्ली में सैकड़ों जनऔषधि केंद्र संचालित हो रहे हैं और उनमें काम करने वाले कर्मचारियों में बड़ी संख्या युवाओं की है। यह दर्शाता है कि देश में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनती जा रही है।

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