मिशन गोल्डन स्पाइस लॉन्च: मेघालय की GI टैग वाली लाकाडोंग हल्दी को मिलेगा वैश्विक ब्रांड का दर्जा, किसानों की आय होगी दोगुनी

मेघालय की प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त लाकाडोंग हल्दी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मिशन गोल्डन स्पाइस की शुरुआत की है। करीब 175.45 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में लाकाडोंग हल्दी की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाएं विकसित करना और इसे दुनिया के प्रीमियम मसालों की श्रेणी में स्थापित करना है। यह मिशन वर्ष 2025 से 2030 तक दो चरणों में लागू किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में उत्पादन, प्रोसेसिंग और विपणन व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में इसका विस्तार और वैश्विक स्तर पर ब्रांडिंग की जाएगी।
इस परियोजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर ऐसा इकोसिस्टम तैयार करेंगे, जिससे किसानों को खेती से लेकर प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात तक हर स्तर पर बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इसके लिए कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, वाणिज्य, निर्यात संवर्धन, अनुसंधान, डिजिटल तकनीक, वित्तीय संस्थानों और राज्य सरकार सहित कई विभागों को एक साझा मंच पर लाया गया है, ताकि लाकाडोंग हल्दी को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।
लाकाडोंग हल्दी अपनी उच्च गुणवत्ता और विशेष रूप से कर्क्यूमिन की अधिक मात्रा के कारण दुनिया भर में अलग पहचान रखती है। सामान्य हल्दी की तुलना में इसमें 7 से 10 प्रतिशत तक कर्क्यूमिन पाया जाता है, जो वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक माना जाता है। यही वजह है कि इसका उपयोग औषधीय उत्पादों, न्यूट्रास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य संबंधी उद्योगों में तेजी से बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य मेघालय को उच्च कर्क्यूमिन वाली ऑर्गेनिक हल्दी का वैश्विक केंद्र बनाना है।
इस मिशन का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में किसानों को लाकाडोंग हल्दी के लिए लगभग 30 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम का मूल्य मिलता है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही हल्दी की खेती का रकबा भी लगभग 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है। इससे हजारों किसानों की आय में वृद्धि होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेघालय की जलवायु और मिट्टी लाकाडोंग हल्दी की गुणवत्ता को विशेष बनाती है। अन्य क्षेत्रों में इसकी खेती के प्रयास किए गए, लेकिन वहां कर्क्यूमिन की मात्रा अपेक्षाकृत कम रही। यही कारण है कि इस उत्पाद की भौगोलिक पहचान और जीआई टैग इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। भविष्य में इसी मॉडल को मेघालय के अनानास, अदरक, कटहल, शहद और मशरूम जैसे अन्य उत्पादों पर भी लागू करने की योजना है।
परियोजना के तहत आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट, कर्क्यूमिन एक्सट्रैक्शन यूनिट, बेहतर कोल्ड चेन, ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच विकसित की जाएगी। इसके अलावा महिलाओं की भागीदारी को विशेष महत्व दिया जाएगा, क्योंकि हल्दी की खेती और प्रसंस्करण में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मिशन के सफल क्रियान्वयन से लाकाडोंग हल्दी केवल एक कृषि उत्पाद नहीं रहेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में “ब्रांड नॉर्थ ईस्ट” के रूप में स्थापित होकर भारत के मसाला निर्यात को नई पहचान देगी और मेघालय के हजारों किसानों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी।
