अमृत मंथन–2026 : अमृत 2.0 परियोजनाओं की प्रगति को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला हुई

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नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा अमृत 2.0 मिशन अंतर्गत प्रदेश के नगरीय निकायों में संचालित जलप्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं को गति प्रदान करने के उद्देश्य से “अमृत मंथन–2026” विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में किया गया।

कार्यशाला में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संजय दुबे विशेष रूप से उपस्थित रहे। श्री दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि नगरीय निकायों द्वारा किया जा रहा कार्य सीधे आमजन के जीवन से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे पूरी जिम्मेदारी, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपको आपातकालीन शक्तियाँ दी गई हैं, जिनका उपयोग जनता के हित में करते हुए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए। श्री दुबे ने कहा कि परियोजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, प्रगति की डिजिटल रिपोर्टिंग और पोर्टल आधारित समीक्षा से जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

समीक्षा बैठक की अध्यक्षता आयुक्त, नगरीय विकास एवं आवास विभाग श्री संकेत भोंडवे द्वारा की गई। कार्यशाला में आयुक्त नगर पालिक निगम, संभागीय अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पालिका परिषद/नगर परिषद के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के दौरान अमृत 2.0 मिशन अंतर्गत प्रदेश में संचालित जलप्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। आयुक्त श्री संकेत भोंडवे ने नगरीय निकायों के अधिकारियों से वन-टू-वन संवाद कर परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की जानकारी ली।

कार्यशाला की मुख्य थीम “संवाद, समाधान और सफलता” रही। इसके अंतर्गत भूमि उपलब्धता, ड्राइंग-डिजाइन लंबित होना, भुगतान में विलंब एवं तकनीकी अड़चनों जैसी समस्याओं पर चर्चा करते हुए त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए।

समीक्षा के दौरान कई परियोजनाओं में धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की गई। पुअर परफार्मेंस करने वालों के विरुद्ध सस्पेंशन, एलडी अधिरोपण एवं ब्लैकलिस्टिंग जैसी कठोर कार्यवाही के निर्देश दिए गए। साथ ही ड्राइंग-डिजाइन अनुमोदन में अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों एवं पीडीएमसी टीम की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए।

आयुक्त श्री भोंडवे ने कहा कि त्रुटिपूर्ण डीपीआर के कारण कई परियोजनाओं में विलंब हो रहा है, अतः डीपीआर तैयार करने वाले सलाहकारों की समीक्षा कर दोषी पाए जाने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।

गौरतलब है कि समीक्षा के दौरान 35 परियोजनाओं के कार्यो में प्रगति धीमी पाई जाने से संबंधित संविदाकारों को नोटिस जारी करने एवं 13 संविदाकार को ब्लैक लिस्ट किये जाने तथा 6 संविदाकारों को आगामी निविदा में भाग लेने के लिये निलम्बित किया गया है।

उन्होंने परियोजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति प्रतिदिन पोर्टल पर अद्यतन करने तथा बिना पूर्व अनुमति किसी भी परियोजना में ईओटी जारी न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। कार्यशाला में अमृत मित्र योजना अंतर्गत जल गुणवत्ता परीक्षण कार्य में संलग्न स्व-सहायता समूह की महिलाओं से भी संवाद किया गया तथा उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का डेमोंस्ट्रेशन देखा गया।

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