कूनो में चीतों का सर्वाइवल रेट दुनिया से बेहतर, 72% शावक सुरक्षित — प्रोजेक्ट चीता की बड़ी सफलता

भारत में फिर से चीता बसाने के उद्देश्य से चल रहे प्रोजेक्ट चीता को बड़ी सफलता मिली है। मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के प्रजनन और शावकों के संरक्षण को लेकर उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। विश्व स्तर पर जहाँ शावकों का सर्वाइवल रेट लगभग 50 प्रतिशत माना जाता है, वहीं कूनो में यह दर 72 प्रतिशत तक पहुँची है। यह उपलब्धि भारत के वन्यजीव संरक्षण और प्रोजेक्ट चीता दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। कूनो में अब तक 6 मादा चीताओं ने कुल 29 शावकों को जन्म दिया है। इनमें से 21 शावक स्वस्थ हैं और संरक्षण टीम की निगरानी में तेजी से विकसित हो रहे हैं। वन विभाग ने बताया कि भारत में चीतों को बसाने का यह पहला बड़ा प्रयास है, और शुरुआती चुनौतियों के बावजूद परिणाम उम्मीद से बेहतर हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, विश्वभर में चीतों के शावकों की मृत्यु दर काफी अधिक रहती है, क्योंकि शुरुआती कुछ सप्ताह उनके जीवन के सबसे संवेदनशील होते हैं। ऐसे समय में कूनो की टीम ने लगातार निगरानी, बेहतर मेडिकल सहायता, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। यही कारण है कि यहाँ सर्वाइवल रेट वैश्विक औसत से काफी ऊपर है।
विभाग की टीम ने हाल ही में 10 और शावकों को सफलतापूर्वक संरक्षित किया, जिसके बाद कूनो में शावकों की कुल संख्या बढ़ गई है। इस उपलब्धि के बाद कूनो में चीतों की जनसंख्या स्थिर रूप से बढ़ने की संभावना और मजबूत हुई है। अधिकारियों के अनुसार, आने वाले वर्षों में यदि यह सफलता जारी रही, तो भारत एक बार फिर से चीता संरक्षण में वैश्विक पहचान स्थापित कर सकता है। प्रोजेक्ट चीता के तहत 2022 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीते भारत लाए गए थे। शुरुआती महीनों में कुछ चुनौतियाँ, मृत्यु और संक्रमण की घटनाएँ सामने आईं, जिससे आलोचना भी हुई। लेकिन अब धीरे-धीरे प्रोजेक्ट पटरी पर आता दिख रहा है और विशेषज्ञ इसे “लॉन्ग-टर्म सफलता का संकेत’’ मान रहे हैं।
वन अधिकारियों ने बताया कि चीतों की बेहतर सुरक्षा के लिए कूनो में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। टीम GPS कॉलर डेटा, ड्रोन गश्त, मेडिकल टीम और कैमराट्रैप जैसे तकनीकी साधनों का उपयोग कर रही है। इसके साथ ही स्थानीय समुदायों को भी संरक्षण अभियान से जोड़ा गया है, ताकि चीतों के लिए अनुकूल और सुरक्षित वातावरण बनाया जा सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो में 72% शावक सुरक्षित रहना यह दर्शाता है कि भारत में चीतों के भविष्य की संभावनाएँ मजबूत हैं। यदि यह सफलता आने वाले वर्षों तक जारी रहती है, तो देश में चीता प्रजाति का पुनर्वास स्थायी रूप से संभव हो सकेगा।
