जून में ऑटो सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार, यात्री वाहन बिक्री में 24% उछाल, दोपहिया और निर्यात ने भी बनाया नया रिकॉर्ड

भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने जून 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए मजबूत मांग और बेहतर बाजार परिस्थितियों का संकेत दिया है। यात्री वाहनों से लेकर दोपहिया, तिपहिया और वाहन निर्यात तक लगभग सभी प्रमुख श्रेणियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ती उपभोक्ता मांग, बेहतर आर्थिक गतिविधियां और ग्रामीण तथा शहरी बाजारों में सकारात्मक खरीदारी का असर वाहन बिक्री के आंकड़ों में साफ दिखाई दिया। उद्योग के लिए यह प्रदर्शन आने वाले महीनों में भी सकारात्मक रुझान का संकेत माना जा रहा है।
जून महीने में यात्री वाहनों की थोक बिक्री में सालाना आधार पर 24.1 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनियों ने डीलरों को कुल 3,88,144 वाहन भेजे, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी अधिक है। इस बढ़त से यह स्पष्ट होता है कि बाजार में नई कारों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है और उपभोक्ताओं का भरोसा ऑटो सेक्टर पर कायम है।
यात्री वाहनों के भीतर यूटिलिटी व्हीकल यानी एसयूवी और अन्य बहुउद्देशीय वाहनों की मांग सबसे मजबूत बनी रही। इस श्रेणी में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और इसकी बिक्री 2.17 लाख यूनिट्स से अधिक रही। दूसरी ओर पारंपरिक यात्री कारों की बिक्री में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली और यह लगभग 99 हजार यूनिट्स तक पहुंच गई। वैन श्रेणी में भी सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया गया, जिससे स्पष्ट है कि सभी प्रमुख सेगमेंट में मांग बनी हुई है।
दोपहिया वाहन बाजार ने भी जून में शानदार प्रदर्शन किया। कंपनियों द्वारा डीलरों को भेजे गए दोपहिया वाहनों की संख्या में करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल बिक्री 18.51 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई। इस श्रेणी में स्कूटर की मांग सबसे तेज रही, जहां बिक्री में 39 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। शहरी क्षेत्रों में बढ़ती व्यक्तिगत आवाजाही और सुविधाजनक परिवहन विकल्पों के कारण स्कूटर की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। वहीं मोटरसाइकिल की बिक्री में भी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मोपेड सेगमेंट में कम आधार के कारण उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली।
तिपहिया वाहन उद्योग ने भी मजबूत प्रदर्शन किया और इस श्रेणी में बिक्री में 26 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। यात्री परिवहन और माल ढुलाई दोनों श्रेणियों में अच्छी मांग देखने को मिली। पैसेंजर कैरियर वाहनों की बिक्री में 25 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि गुड्स कैरियर वाहनों की बिक्री लगभग 30 प्रतिशत तक बढ़ गई। इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है और ई-रिक्शा की बिक्री में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
भारतीय ऑटो उद्योग के लिए निर्यात के मोर्चे पर भी अच्छी खबर सामने आई। जून में कुल वाहन निर्यात में 34 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई। सबसे अधिक वृद्धि दोपहिया वाहनों के निर्यात में रही, जहां 40 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखने को मिला। तिपहिया वाहनों का निर्यात भी लगभग 40 प्रतिशत बढ़ा, जबकि यात्री वाहनों का निर्यात स्थिर बना रहा। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि भारतीय वाहन निर्माता वैश्विक बाजारों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू मांग, निर्यात में लगातार सुधार, इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता और बेहतर आर्थिक माहौल आने वाले समय में भी भारतीय ऑटो उद्योग को मजबूती प्रदान कर सकते हैं। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो वर्ष 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अब तक के सबसे सफल वर्षों में से एक साबित हो सकता है।
