भारत में SUV और यूटिलिटी वाहनों का बढ़ा दबदबा, हर 10 पैसेंजर गाड़ियों में 7 UV; ऑटो बाजार में तेजी

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भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है। अब लोग पारंपरिक छोटी कारों के मुकाबले SUV और दूसरे यूटिलिटी वाहनों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक बिकने वाले प्रत्येक 10 पैसेंजर वाहनों में लगभग सात यूटिलिटी वाहन हैं। इस बदलाव ने भारतीय कार बाजार की दिशा को काफी हद तक प्रभावित किया है। यूटिलिटी वाहन सेगमेंट न केवल बिक्री में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है, बल्कि पूरे पैसेंजर वाहन बाजार की ग्रोथ को भी मजबूती दे रहा है।

ऑटोमोबाइल बाजार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में घरेलू पैसेंजर वाहन बिक्री में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच बिक्री में कुल 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान यूटिलिटी वाहनों की मांग सबसे मजबूत रही। ग्राहकों की बदलती जरूरतों, बेहतर फीचर्स और SUV की लोकप्रियता ने इस सेगमेंट को बाजार का प्रमुख हिस्सा बना दिया है।

यूटिलिटी वाहनों की हिस्सेदारी 69 प्रतिशत तक पहुंची

भारतीय पैसेंजर वाहन बाजार में यूटिलिटी वाहनों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है। सितंबर 2025 में कुल पैसेंजर वाहन बिक्री में UV सेगमेंट की हिस्सेदारी लगभग 67 प्रतिशत थी, जो सितंबर 2026 में बढ़कर करीब 69 प्रतिशत हो गई। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से सितंबर तक की अवधि में यह हिस्सेदारी लगभग 68 प्रतिशत रही।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि SUV और अन्य यूटिलिटी वाहनों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। भारतीय ग्राहक अब ऐसी गाड़ियों को पसंद कर रहे हैं, जिनमें पर्याप्त केबिन स्पेस, ऊंची ड्राइविंग पोजिशन, आरामदायक सफर और आधुनिक तकनीक उपलब्ध हो।

परिवार के साथ लंबी यात्रा करने वाले ग्राहकों से लेकर शहरों में रोजाना गाड़ी चलाने वाले लोगों तक, SUV सेगमेंट ने अलग-अलग जरूरतों के अनुसार अपनी जगह बनाई है। कंपनियां भी ग्राहकों की इस पसंद को देखते हुए नए मॉडल और अलग-अलग कीमतों में वाहन पेश कर रही हैं।

सितंबर में पैसेंजर वाहन बिक्री में 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी

सितंबर 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अच्छा महीना रहा। घरेलू पैसेंजर वाहन बाजार में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल-सितंबर 2026 की अवधि में कुल बिक्री वृद्धि 28 प्रतिशत रही।

इस प्रदर्शन में यूटिलिटी वाहनों की अहम भूमिका रही। अप्रैल से सितंबर के बीच इस सेगमेंट की बिक्री में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कारों की बिक्री में 23 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया।

यूटिलिटी वाहनों की तेज वृद्धि यह दिखाती है कि बाजार में मांग केवल बढ़ ही नहीं रही, बल्कि उसका स्वरूप भी बदल रहा है। जहां पहले छोटी और हैचबैक कारें बड़ी संख्या में खरीदी जाती थीं, वहीं अब SUV और अन्य बड़े वाहनों की ओर ग्राहकों का रुझान बढ़ रहा है।

वाहन निर्माता कंपनियों के लिए यह बदलाव नए अवसर पैदा कर रहा है। कंपनियां अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में SUV की संख्या बढ़ाने, नए फीचर्स जोड़ने और ग्राहकों को अलग-अलग बजट में विकल्प देने पर ध्यान दे रही हैं।

टू-व्हीलर बाजार में भी मांग मजबूत

भारत में दोपहिया वाहनों की मांग भी सकारात्मक बनी हुई है। सितंबर 2026 में ICE यानी पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन वाले टू-व्हीलर्स की बिक्री में सालाना आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अप्रैल से सितंबर तक की अवधि में यह बढ़ोतरी 13 प्रतिशत रही।

इस बाजार में स्कूटरों का प्रदर्शन मोटरसाइकिलों के मुकाबले बेहतर रहा। वित्त वर्ष में अब तक स्कूटरों की बिक्री में 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि मोटरसाइकिलों की बिक्री 10 प्रतिशत बढ़ी।

स्कूटरों की लोकप्रियता के पीछे शहरी आवागमन, आसान ड्राइविंग और रोजमर्रा के इस्तेमाल जैसी जरूरतें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। दूसरी ओर, मोटरसाइकिल बाजार में भी मांग बनी हुई है। खासकर 150 सीसी से अधिक इंजन क्षमता वाले मॉडल बिक्री को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे।

दोपहिया वाहन भारतीय परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में इस सेगमेंट की मजबूत बिक्री ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत देती है।

कमर्शियल वाहन सेगमेंट में भी जोरदार ग्रोथ

पैसेंजर वाहनों और दोपहिया गाड़ियों के अलावा कमर्शियल वाहन बाजार में भी मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में घरेलू कमर्शियल वाहन बिक्री में सालाना आधार पर 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष में अब तक बिक्री 24 प्रतिशत बढ़ी।

कमर्शियल वाहनों की मांग को आर्थिक गतिविधियों, माल ढुलाई, निर्माण कार्य और कारोबार से जुड़ी जरूरतों के संदर्भ में देखा जाता है। ट्रक, बस और अन्य व्यावसायिक वाहनों की बिक्री में तेजी परिवहन तथा लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की गतिविधियों का संकेत दे सकती है।

हालांकि, इस वृद्धि के लंबे समय तक बने रहने के लिए आर्थिक परिस्थितियों, परिचालन लागत और कारोबार की मांग पर भी नजर रखनी होगी।

ऑटो कंपनियों के सामने बढ़ती लागत की चुनौती

वाहनों की बिक्री में अच्छी वृद्धि के बावजूद ऑटोमोबाइल कंपनियों के सामने कुछ चुनौतियां भी बनी हुई हैं। इनमें सबसे प्रमुख चिंता कच्चे माल और अन्य इनपुट की बढ़ती लागत है। पश्चिम एशिया में संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता के कारण लागत पर दबाव बने रहने की आशंका जताई गई है।

वाहन निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न कच्चे माल, कलपुर्जों और ऊर्जा की लागत बढ़ने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनियों के लिए बिक्री बढ़ाने के साथ अपने मार्जिन को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

यदि लागत में लगातार वृद्धि होती है, तो कंपनियों को कीमतों, उत्पादन और उपलब्ध मॉडलों की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लागत कितनी बढ़ती है और कंपनियां उसे किस हद तक संभाल पाती हैं।

त्योहारी सीजन से पहले बिक्री में तेजी की उम्मीद

त्योहारी सीजन भारतीय वाहन बाजार के लिए आमतौर पर महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान कई ग्राहक नई कार, SUV या दोपहिया वाहन खरीदने की योजना बनाते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अधिकांश मूल उपकरण निर्माता कंपनियों यानी OEMs के पास त्योहारी सीजन से पहले एक महीने से भी कम की चैनल इन्वेंट्री बची है।

कम इन्वेंट्री के कारण कंपनियां डीलरों तक वाहनों की आपूर्ति बढ़ाने पर ध्यान दे सकती हैं। इसी वजह से वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में डिस्पैच में तेजी आने की संभावना जताई गई है।

हालांकि, डिस्पैच और वास्तविक ग्राहक बिक्री में अंतर होता है। कंपनियों से डीलरों तक पहुंचने वाले वाहनों की संख्या बढ़ने का मतलब यह जरूरी नहीं कि उतनी ही तेजी से अंतिम ग्राहकों की खरीद भी बढ़े। इसलिए बाजार की वास्तविक स्थिति समझने के लिए खुदरा बिक्री और डीलर स्टॉक पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण है।

दूसरी छमाही में ऑटो बाजार का क्या रहेगा रुख?

मौजूदा रुझानों के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में मांग मजबूत रहने की उम्मीद है। हालांकि, वृद्धि की दर में कुछ नरमी आ सकती है। यूटिलिटी वाहनों की लोकप्रियता, दोपहिया बाजार की मांग और कमर्शियल वाहन सेगमेंट की तेजी उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत हैं।

आने वाले महीनों में ग्राहकों की खरीद क्षमता, वाहन कीमतों, ब्याज दरों, ईंधन लागत और कंपनियों की आपूर्ति रणनीति का बाजार पर असर पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में यूटिलिटी वाहनों की बढ़ती हिस्सेदारी एक बड़ा बदलाव है। पैसेंजर वाहन बाजार में हर 10 में से लगभग सात वाहनों का UV सेगमेंट से आना SUV की मजबूत स्थिति को दर्शाता है। यदि मांग बनी रहती है और कंपनियां लागत संबंधी चुनौतियों को संभाल लेती हैं, तो यह सेगमेंट आने वाले समय में भी भारतीय वाहन बाजार की वृद्धि का प्रमुख आधार बना रह सकता है।

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